नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा झटका दे दिया. इसकी गूंज पूरी दुनिया के व्यापार जगत में सुनाई दे रही है. सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन के अलग-अलग देशों पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है. इस कड़े फैसले के बाद अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या अमेरिकी सरकार टैरिफ के नाम पर वसूले गए 175 अरब डॉलर (करीब $175 बिलियन) की भारी रकम वापस लौटाएगी.
ट्रंप प्रशासन के लिए अब असली मुसीबत रिफंड की यह विशाल रकम है. एक अनुमान के मुताबिक, 175 अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू रिफंड क्लेम के दायरे में आ सकता है. जिन अमेरिकी कंपनियों ने अपने व्यापार को चालू रखने के लिए अरबों डॉलर की एक्स्ट्रा ड्यूटी चुकाई है, वे अब अपना पैसा वापस मांगने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र हैं.
इस आर्थिक उलझन पर अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ, तो ट्रेजरी विभाग रिफंड जारी कर सकेगा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने खुद यह चेतावनी दी है कि अलग-अलग कंपनियों और देशों का हिसाब करके अरबों डॉलर वापस करने की यह पूरी प्रक्रिया कागजी और तकनीकी रूप से बहुत मुश्किल होने वाली है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA कानून के तहत लगाए गए सभी टैरिफ को ही अवैध मान लिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि भारत को अब वह बची हुई 18% ड्यूटी भी नहीं चुकानी होगी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले से अमेरिका जाने वाले भारत के लगभग 55% निर्यात पूरी तरह से इस 18% ड्यूटी से मुक्त हो जाएंगे. अब इन पर सिर्फ पहले वाला सामान्य टैक्स लगेगा और भारत के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी साबित होगी.
इस फैसले के लागू होने से टेक्सटाइल, लेदर, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे अहम सेक्टर्स के उत्पाद अमेरिकी बाजार में अपनी पुरानी और सस्ती दरों पर बिक सकेंगे. इससे न सिर्फ निर्यात में भारी उछाल आएगा, बल्कि भारतीय कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन भी कई गुना बढ़ जाएगा. इसके अलावा जिन अमेरिकी आयातकों और भारतीय कंपनियों ने अब तक इस गैर-कानूनी टैरिफ के नाम पर करोड़ों डॉलर चुकाए हैं, वे 175 अरब डॉलर के विशाल रिफंड पूल से अपना पैसा वापस मांग सकेंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति के पास इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल करके असीमित टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था. अब तक ट्रंप प्रशासन इसी एक्ट का हवाला देकर मनमाने तरीके से विदेशी उत्पादों पर ड्यूटी थोप रहा था.
सुप्रीम कोर्ट की इस रूलिंग के बाद, गैर-कानूनी तरीके से लगाए गए ये सभी टैरिफ तुरंत प्रभाव से रद्द हो जाएंगे. इसका सीधा असर यह होगा कि अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) विभाग को अब ये टैक्स वसूलना तुरंत बंद करना होगा. इसके अलावा जिन कंपनियों पर इन टैक्स को न चुकाने के कारण कार्रवाई चल रही थी, उसे भी पूरी तरह से सस्पेंड या खत्म किया जा सकता है.
गौरतलब है कि यह ऐतिहासिक मामला उन अमेरिकी कंपनियों और 12 राज्यों ने मिलकर दायर किया था, जिन्हें इन मनमाने टैरिफ की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था. निचली अदालतें पहले ही ट्रंप के फैसले को गलत ठहरा चुकी थी. अब सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगने के बाद प्रशासन पर रिफंड का भारी दबाव बन गया है.