भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी हाउस में आज होगा बिल पर मतदान

अमेरिका में रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर लाए गए एक विधेयक पर आगे बढ़ने की तैयारी है, जिसमें भारत समेत कई देशों को संभावित 100 फीसदी टैरिफ के दायरे में लाने का प्रस्ताव है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: भारत के लिए अमेरिका से जुड़ी व्यापारिक चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है. रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े कदम उठाने से जुड़े एक अमेरिकी विधेयक में भारत का नाम भी प्रस्तावित संशोधन के जरिए शामिल किया गया है. इस प्रस्ताव के तहत संबंधित देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है. अब इस विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मंजूरी मिलने की जरूरत है, जिसके बाद इसकी अगली दिशा तय होगी.

लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट

मामला लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट से जुड़ा है. यह विधेयक अमेरिकी सीनेट में 86-11 वोटों से पारित हो चुका है. प्रस्तावित बदलाव में भारत के अलावा चीन, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक जैसे देशों के नाम शामिल करने की बात कही गई है. प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिलने पर इन देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने का प्रावधान लागू हो सकता है.

रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी

इस विधेयक का उद्देश्य रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंधों को मजबूत करना है. इसमें उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिनके जरिए रूस तेल की मौजूदा पाबंदियों से बचकर आपूर्ति करता है. ऐसे जहाजों के नेटवर्क को अक्सर शैडो फ्लीट कहा जाता है. अमेरिका का कहना है कि रूस को कच्चे तेल से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए आर्थिक मदद देता है.


किन देशों पर पड़ सकता है असर

डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर की ओर से पेश किए गए संशोधन में कई देशों को संभावित टैरिफ के दायरे में लाने का प्रस्ताव है. इसमें भारत और चीन के साथ तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक शामिल हैं. हालांकि, इन प्रस्तावित देशों के नाम सीनेट से पारित मूल विधेयक में शामिल नहीं थे. सीनेट संस्करण में सबसे बड़े तेल और गैस आयातकों में शामिल पांच देशों का उल्लेख किया गया था.

भारत पहले भी झेल चुका है टैरिफ

भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिका पहले भी टैरिफ लगा चुका है. पिछले साल भारत पर 25 फीसदी और फिर अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क लगाया गया था, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुंच गया था. बाद में इसमें कमी की गई. इसी बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. ऐसे में नए प्रस्तावित शुल्क का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

अमेरिकी सांसदों में भी मतभेद

इस विधेयक को लेकर अमेरिका में सभी सांसद एकमत नहीं हैं. हकीम जेफ्रीज समेत कुछ डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसका विरोध किया है. विरोध करने वाले सांसदों का तर्क है कि यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के टैरिफ लगाने के अधिकार को जरूरत से ज्यादा बढ़ा सकता है, जबकि रूस पर प्रतिबंध अनिवार्य नहीं करता. उनका कहना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं महंगी हो सकती हैं और लंबे समय में यूक्रेन के समर्थन पर भी असर पड़ सकता है.