US Pakistan Defence Ties: पाकिस्तान-अमेरिका के बीच बड़ी डिफेंस डील, आसिम मुनीर को ट्रंप देंगे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
US Pakistan Defence Ties: इस सौदे को अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में सुधार का संकेत माना जा रहा है. पिछले महीने वाशिंगटन डीसी में ट्रम्प की शहबाज शरीफ और असीम मुनीर से मुलाकात ने इसे और मजबूती दी.
US Pakistan Defence Ties: अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंधों में नई गर्मजोशी देखने को मिल रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ओवल ऑफिस में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद यह संकेत मिला है. अमेरिकी मिसाइल अनुबंध में पाकिस्तान को शामिल किए जाने से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग एक नए स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है. इस सौदे के तहत पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM यानी हवा से हवा में मार करने वाली उन्नत मध्यम दूरी की मिसाइलें मिलेंगी.
यह समझौता अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रिश्तों को मज़बूत करने के साथ-साथ पाकिस्तान की एफ-16 वायु सेना को आधुनिक बनाने में भी मदद करेगा. अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया कि इस अनुबंध में पाकिस्तान के अलावा यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, जापान और सऊदी अरब भी शामिल हैं. अनुबंध का कुल मूल्य अब 2.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है, और काम मई 2030 तक पूरा होने की उम्मीद है.
AMRAAM मिसाइलें और पाकिस्तान
AMRAAM मिसाइल केवल एफ-16 विमानों के साथ संगत है. पाकिस्तान वर्तमान में पुराने AIM-120C5 संस्करण का इस्तेमाल करता है, जिन्हें 2010 में ब्लॉक 52 F-16 के साथ खरीदा गया था. अब AIM-120C8 और AIM-120D के निर्यात संस्करण मिलने से पाकिस्तान की वायु सेना की मारक क्षमता बढ़ जाएगी. 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के उड़ाए मिग-21 को मार गिराने में भी AMRAAM का इस्तेमाल किया गया था.
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संबंधों में सुधार का संकेत
इस सौदे को अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में सुधार का संकेत माना जा रहा है. पिछले महीने वाशिंगटन डीसी में ट्रम्प की शहबाज शरीफ और असीम मुनीर से मुलाकात ने इसे और मजबूती दी. इसके अलावा, पीएएफ प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर का अमेरिकी विदेश विभाग का दौरा और मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद दोनों देशों में शांति की पहल ने भी रिश्तों में गर्मजोशी लाने में मदद की.
विवाद और भारत का रुख
हालांकि, पाकिस्तान ने हालिया युद्धविराम में ट्रम्प की भूमिका को लेकर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया. भारत का कहना है कि युद्धविराम दोनों देशों के महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ था.