'वर्दी उतारकर आओ तब हैसियत का पता चल जाएगा', POK में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ तेज हुआ विरोध

पीओके में JAAC के नेतृत्व में पाकिस्तान सेना और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारी स्थानीय अधिकार, राजनीतिक भागीदारी और नागरिक मामलों में सेना की भूमिका कम करने की मांग कर रहे हैं.

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Km Jaya

नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान की सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं. जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन लीग यानी JAAC के बैनर तले हजारों लोग विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. हालिया रैली में संगठन के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सेना को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है, तो उसे वर्दी छोड़कर आम जनता के बीच आना चाहिए. इस बयान के बाद आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

रावलकोट के फारुक ए आजम चौक पर आयोजित रैली को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में नागरिक मामलों पर सेना का प्रभाव बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलना चाहिए. उनके अनुसार देश के कई हिस्सों में लोग अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का क्या है कहना?

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पीओके के लोगों को अपने प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल रही है. उनका आरोप है कि क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में स्थानीय लोगों की भूमिका सीमित है. आंदोलनकारी स्थानीय शासन, पारदर्शी चुनाव और प्रशासनिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि यह आंदोलन पहले बिजली दरों के मुद्दे से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें भी जुड़ गई हैं.


रैली के दौरान सरदार अमन खान ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और न्याय व्यवस्था की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों पर कर का बोझ बढ़ रहा है, जबकि सत्ता और प्रभावशाली वर्ग को इसका अधिक लाभ मिलता है. उन्होंने न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि आम लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता.

पाक सरकार और सेना की कैसी रही प्रतिक्रिया?

पाकिस्तान सरकार और सेना की ओर से पहले भी JAAC को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है. सरकार ने संगठन के कुछ आरोपों और गतिविधियों को खारिज किया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन के दौरान हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई लोगों की मौत होने के दावे भी सामने आए हैं. हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.