मिडिल ईस्ट में चल रहे इस भारी तनाव ने दुनिया भर के तेल बाजारों में दहशत पैदा कर दी है. इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी ऊर्जा सचिवक्रिस राइट ने अपने ही पिछले दावे से साफ यू-टर्न लेते हुए माना है कि अमेरिकी नौसेना फिलहाल इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल ऑयल टैंकरों को एस्कॉर्ट देने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. यह बयान साफ-साफ दिखाता है कि ट्रंप की टीम कभी भी किसी भी मामले में यू-टर्न ले सकती है.
इससे पहले एक्स X पर किए गए एक (अब डिलीट हो चुके) पोस्ट में राइट ने दावा किया था कि अमेरिकी नौसेना ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को जारी रखने के लिए एक ऑयल टैंकर को एस्कॉर्ट किया है. गुरुवार को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि अमेरिकी सेना के सभी मिलिट्री एसेट्स इस वक्त ईरान की हमलावर क्षमताओं और उन्हें सप्लाई करने वाली मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को नष्ट करने पर फोकस कर रहे हैं. वहीं उनहोंने कहा कि पेंटागन इस ऑपरेशन की सक्रिय रूप से तैयारी कर रहा है और इस महीने के अंत तक जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू किया जा सकता है.
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका के पहले वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें तेल टैंकर को एस्कॉर्ट करने की बात कही गई थी. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता अलीमोहम्मद नैनी ने ईरानी सरकारी मीडिया में इसे पूरी तरह झूठ करार देते हुए चेतावनी दी है कि उनकी सेना इस इलाके में अमेरिका की किसी भी हरकत का कड़ा सामना करेगी. ईरान ने यह भी धमकी दी है कि अगर दुश्मनी बढ़ती है, तो वह इस अहम जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को अपना निशाना बना सकता है.
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गई थी. होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया भर की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ती है. ऐसे में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों और भारी इंश्योरेंस लागत के कारण कई एनर्जी ट्रेडर्स और शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है या यात्रा में देरी कर दी है.