'नहीं हटे तो देंगे जवाब', जापान में अमेरिकी मिसाइल सिस्टम की तैनाती से नाराज रूस ने दी चेतावनी
जापान-अमेरिका के सैन्य अभ्यास के दौरान क्यूशू में अमेरिकी Typhon मिसाइल सिस्टम की तैनाती को लेकर रूस ने चिंता जताई है. रूस का कहना है कि अगर सिस्टम अभ्यास खत्म होने के बाद भी जापान में रहता है तो मॉस्को जवाबी कदम उठा सकता है.
जापान और अमेरिका के सैन्य अभ्यास के दौरान क्यूशू में अमेरिकी Typhon मिसाइल सिस्टम की तैनाती को लेकर रूस ने चिंता जताई है. रूसी अधिकारियों ने कहा है कि अगर अभ्यास खत्म होने के बाद भी यह सिस्टम जापान में मौजूद रहता है, तो मॉस्को जवाबी कदम उठा सकता है. रूस ने पहले भी जापान के सामने इस तैनाती को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी.
Typhon अमेरिकी सेना का मोबाइल ग्राउंड-बेस्ड मिसाइल सिस्टम है. इससे Tomahawk जैसी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें दागी जा सकती हैं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार Tomahawk की मारक क्षमता करीब 1,600 किलोमीटर तक बताई जाती है.
रूस के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
जापान के क्यूशू में इस सिस्टम की तैनाती रूस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां से दागी गई लंबी दूरी की मिसाइलें रूस के सुदूर पूर्व और चीन के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकती हैं. इसी वजह से मॉस्को इसे अपने सुरक्षा हितों से जुड़ा मुद्दा मान रहा है.
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रूस ने जापान को पहले भी भेजा था विरोध-पत्र
सितंबर में हुए ओरिएंट शील्ड सैन्य अभ्यास में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं ने हिस्सा लिया. इसी अभ्यास के दौरान अमेरिकी Typhon सिस्टम को जापान के क्यूशू में तैनात किया गया. रूस ने इस तैनाती को लेकर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी. रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को ने 3 सितंबर को जापान को औपचारिक विरोध-पत्र भी भेजा था.
रूस को किस बात का डर?
रूस की मुख्य चिंता यह है कि Typhon सिस्टम केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित न रह जाए. रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको के मुताबिक, जापान ने भरोसा दिलाया है कि अभ्यास समाप्त होने के बाद सिस्टम को हटा लिया जाएगा. हालांकि, रुडेंको ने जापान की मौजूदा सरकार पर मॉस्को के कम भरोसे की बात कही है. रूस का कहना है कि अगर अमेरिकी मिसाइल सिस्टम स्थायी या लंबे समय के लिए जापान में रह जाता है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो सकता है.
Typhon से जुड़ा विवाद
Typhon से जुड़ा विवाद शीत युद्ध के दौर की 1987 की Intermediate-Range Nuclear Forces यानी INF Treaty से भी जुड़ता है. इस संधि ने अमेरिका और सोवियत संघ के बीच जमीन से दागी जाने वाली 500 से 5,500 किलोमीटर तक की रेंज वाली मिसाइलों पर रोक लगाई थी. अमेरिका ने 2019 में INF Treaty से हटने की घोषणा की थी. इसके बाद जमीन से दागी जाने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास और तैनाती का रास्ता खुला.
क्यूशू की लोकेशन बनी अहम वजह
जापान का क्यूशू द्वीप पूर्वी एशिया में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर है. यहां अमेरिकी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली की मौजूदगी रूस के साथ-साथ चीन की सुरक्षा चिंताओं को भी बढ़ा सकती है. हालांकि, किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अलग-अलग देशों के बयान और आकलन अलग हो सकते हैं. फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यही है कि Typhon सिस्टम जापान में केवल सैन्य अभ्यास के लिए अस्थायी रूप से आया है या भविष्य में इसकी मौजूदगी को बढ़ाया जा सकता है.