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खतरनाक मोड़ पर अमेरिका-ईरान टकराव, ओमान तट के पास होर्मुज में जहाज पर हुए हमले से बढ़ा तनाव

ओमान के तट के पास होर्मुज में एक व्यावसायिक जहाज में आग लगने की घटना ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव को और गंभीर बना दिया है. इसी बीच अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान पर हवाई हमले किए.

AI
Shanu Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा तनाव शुरू होने के बाद घटने का नाम नहीं ले रहा है. होर्मुज में सोमवार को एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले ने वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हालांकि अभी तक इस आग का असली कारण पता नहीं चल पाया है. 

होर्मुज को महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. इस रास्ते से सामान्य दिनों में दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. हाल के दिनों में अमेरिकी सेना ने व्यावसायिक जहाजों को ओमान के तट के नजदीक से गुजरने की सलाह दी थी, जबकि ईरान इस मार्ग पर अपने प्रभाव का दावा करता रहा है.

अमेरिका का लगातार नौवीं रात हवाई हमला

तनाव के बीच अमेरिका ने सोमवार तड़के ईरान पर एक और बड़े हवाई अभियान को अंजाम दिया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य उन ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है.


अमेरिकी सेना का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती. हाल के दिनों में अमेरिका ने सैन्य ठिकानों के साथ-साथ पुलों, बिजली सुविधाओं और अन्य रणनीतिक ढांचों को भी निशाना बनाया है.

अमेरिकी सैनिक की मौत से बढ़ा तनाव

अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि इराक में गिराए गए एक ईरानी ड्रोन को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने के दौरान एक सैनिक की मौत हो गई. इसके साथ ही मौजूदा संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. इससे पहले जॉर्डन में हुए हमलों के लिए भी अमेरिका ने ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया था. अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमलों का नया दौर शुरू किया.

इस बीच कुवैत के एक डिसेलिनेशन प्लांट में आग लगने की घटना ने चिंता और बढ़ा दी है. देश के अधिकांश पीने के पानी की आपूर्ति ऐसे संयंत्रों पर निर्भर करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह आगे बढ़ता रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.