US Israel Iran War

अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव, शांति समझौते के बाद एक-दूसरे पर हमले शुरू

मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के कुछ दिन बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए.

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Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के कुछ दिन बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए. यह घटना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ईरान ने 25 जून को ओमान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक जहाज पर हमला किया था. 

इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा तटीय रडार साइटों पर हमला किया. अमेरिका ने इसे बिना वजह की आक्रामकता बताया है. CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और समझौते की हर शर्त का पालन कराएगी.

ईरान का जवाब:

ईरान ने भी अमेरिका के हमले का जवाब दिया. ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया. हालांकि, इसकी पूरी डिटेल नहीं दी गई. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि अगर अमेरिका ने फिर आक्रमण किया तो हमारा जवाब और भी बड़ा होगा.


होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा विवाद:

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल का करीब 20% गुजरता है. ईरान कहता है कि यह क्षेत्र उसके नियंत्रण में रहेगा, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह पूरी तरह खुला रहे. वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हमले की निंदा की और कहा कि जहाजों पर हमला करना शांति समझौते का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन है. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने भी चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान के हमलों का हिंसक जवाब देगा.

ईरान ने जवाब देते हुए कहा कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बरकरार रहेगा. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा, “यह युद्धविराम का उल्लंघन नहीं, बल्कि युद्धविराम का प्रबंधन है.” दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है. वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो पूरा मध्य पूर्व फिर से अस्थिर हो सकता है. फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.