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US -ईरान के बीच पाक कराएगा सुलह! शहबाज शरीफ की पहल पर ईरान से बात करने को राजी हुए ट्रंप, क्या टल जाएगा महायुद्ध?

अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए बातचीत की तैयारी तेज हो गई है. ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के निमंत्रण को सोशल मीडिया पर साझा कर इसकी मंजूरी दे दी. पाकिस्तान सेना प्रमुख की भूमिका को अहम माना जा रहा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए संभावित वार्ता के मेजबान के तौर पर पाकिस्तान का नाम सामने रखा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर अमेरिका और ईरान से सहमति मिलने पर बातचीत की मेजबानी की पेशकश की थी. ट्रंप ने इसे कुछ ही घंटों में साझा कर अपनी सहमति दे दी. यह कूटनीतिक घटनाक्रम तब हुआ जब ईरान और इजराइल के बीच आपसी हमले जारी हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की है. ट्रंप ने इस पोस्ट को स्क्रीनशॉट कर अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर साझा किया. यह कदम ट्रंप के उस बयान से काफी अलग है जिसमें वे कहते थे कि अमेरिका यह जंग पहले ही जीत चुका है.

अमेरिका की टीम और संभावित वार्ता का स्थान

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘एक्सिओस’ के मुताबिक, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर इसी सप्ताह ईरानी प्रतिनिधिमंडल से पाकिस्तान में मुलाकात कर सकते हैं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी उनके साथ शामिल होने की संभावना है. राजधानी इस्लामाबाद को वार्ता के संभावित स्थान के रूप में देखा जा रहा है. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जो पाकिस्तान सेना के प्रमुख हैं, को इस प्रक्रिया में अहम भूमिका में देखा जा रहा है.

ईरान का रुख और संभावित प्रतिनिधि

ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुरू में ट्रंप के बैकचैनल वार्ता के दावे का मजाक उड़ाया था. लेकिन बाद में राज्य समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरान ने स्वीकार किया कि उसे ‘कुछ मित्र देशों’ से संदेश मिले हैं कि अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत चाहता है. संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ को ईरान का संभावित प्रतिनिधि माना जा रहा है. हालांकि, उनका सार्वजनिक रुख अभी भी कठोर बना हुआ है.

युद्धविराम के बीच जारी संघर्ष और भू-राजनीति

शांति प्रयासों के बीच मंगलवार को ईरान और इजराइल के बीच फिर से हमले हुए. इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका अभियान ‘पूरी ताकत से’ जारी रहेगा. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने करीबी रॉन डेर्मर को अमेरिका-ईरान वार्ता पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी है. इस बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से फोन पर बात की और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर जोर दिया.

क्षेत्रीय दलों की सक्रियता और विश्लेषकों की राय

पाकिस्तान के अलावा, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की भी सक्रिय मध्यस्थता कर रहे हैं. पारंपरिक मध्यस्थ कतर ने युद्ध समाप्त करने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शुक्रवार को ईरान मुद्दे पर चर्चा के लिए फ्रांस में जी-7 देशों के अपने समकक्षों से मिलेंगे. हालांकि, विश्लेषक सतर्क हैं. पेरिस स्थित थिंक-टैंक के विशेषज्ञ डेविड खलफा ने कहा कि भरोसा पूरी तरह टूट चुका है और दोनों पक्षों के रुख में जमीन-आसमान का फर्क है.