'सब कुछ उड़ा देंगे और तेल पर होगा हमारा कब्जा', डेडलाइन खत्म होने से पहले बोले ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर है. राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त 'मंगलवार की डेडलाइन' और ईरान द्वारा स्थायी शांति की मांग ने इस टकराव को एक गहरे वैश्विक संकट में तब्दील कर दिया है.
नई दिल्ली: अगले 24 घंटे न केवल अमेरिका और ईरान के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं. सवाल खड़ा है कि क्या विनाशकारी जंग थमेगी या तबाही का एक नया दौर शुरू होगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए मंगलवार तक का अंतिम समय दिया है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब ट्रंप ने कड़े लहजे में साफ कर दिया कि उनकी इस 'डेडलाइन' में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. ट्रंप का यह रुख तब और सख्त हुआ जब ईरान ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की की ओर से पेश किए गए 15-सूत्रीय मध्यस्थता प्रस्ताव को ठुकरा दिया.
ट्रंप ने अमेरिका की 'रेडलाइन' को रेखांकित करते हुए कहा कि इस पूरे युद्ध का मुख्य केंद्र यह है कि ईरान के पास किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं हो सकते. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता है, तो अमेरिका उसे 'पूरी तरह तबाह' कर देगा. ट्रंप के अनुसार, उनके पास ऐसे सैन्य विकल्प हैं जिससे ईरान का कोई भी पुल या पावर प्लांट सुरक्षित नहीं रहेगा. ईरान के तेल के बारे में राष्ट्रपति ने कहा कि वह तेल कब्जा करने के लिए ही है और ईरान की सरकार इसमें कुछ नहीं कर पाएगी. उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि यदि यह उनके हाथ में होता, तो वे तेल लेकर उससे भारी पैसा कमाते.
ईरान का पलटवार और 10-सूत्रीय मांगें
दूसरी ओर, तेहरान ने भी झुकने के संकेत नहीं दिए हैं. ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरान ने ट्रंप के ताजा सीजफायर प्रस्ताव को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है. ईरान का तर्क है कि उसे कुछ दिनों या हफ्तों का अस्थायी युद्धविराम मंजूर नहीं है, बल्कि वह समस्या का एक स्थायी समाधान चाहता है. ईरान ने फिलहाल होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया है और पाकिस्तान व अन्य मध्यस्थों के जरिए अपना 10-सूत्रीय जवाब भेजा है. उनकी प्रमुख मांगों में पूरे क्षेत्र में लड़ाई का खात्मा, प्रतिबंधों में ढील और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई शामिल है.
मध्यस्थता की कोशिशें और वैश्विक संकट
ट्रंप ने ईरान के इस जवाबी प्रस्ताव को 'महत्वपूर्ण कदम' तो माना है, लेकिन इसे 'पर्याप्त' नहीं बताया है. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ईरान कुछ अहम मांगें मान लेता है, तो संघर्ष जल्दी खत्म हो सकता है, वरना उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका वहां से अभी भी निकल सकता है, लेकिन वे इस मुद्दे को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं. अब पूरी दुनिया की नजरें मंगलवार की उस समयसीमा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि मध्य-पूर्व शांति की ओर बढ़ेगा या एक व्यापक विनाश की ओर.
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