अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीयों के लिए बड़ा झटका? H-1B वीजा नियमों में होने वाला बदलाव बढ़ाएगा खर्च
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वीजा एक्सटेंशन पर अतिरिक्त शुल्क लागू करने की तैयारी में है. अभी यह शुल्क केवल नए वीजा पर लागू होता है, लेकिन प्रस्ताव लागू होने पर वीजा नवीनीकरण भी महंगा हो जाएगा.
नई दिल्ली: अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए बड़ी चिंता वाली खबर सामने आई है. ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वीजा के नवीनीकरण पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है. अभी तक यह अतिरिक्त शुल्क केवल नए वीजा आवेदनों पर लागू होता है, लेकिन प्रस्ताव लागू होने पर वीजा बढ़वाने वाली कंपनियों को भी अधिक खर्च उठाना पड़ सकता है. यह प्रस्ताव लागू होने पर सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ने की संभावना है, जिनके यहां बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी कार्यरत हैं. खासकर भारतीय आईटी पेशेवर और टेक कंपनियां इसकी सीधी चपेट में आ सकती हैं, क्योंकि H-1B वीजा एक्सटेंशन में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है.
वीजा नवीनीकरण पर भी लग सकता है अतिरिक्त शुल्क
ट्रंप प्रशासन H-1B और L-1 वीजा से जुड़े अतिरिक्त शुल्क का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है. यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो केवल नए वीजा ही नहीं बल्कि मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी यह शुल्क देना होगा. इससे विदेशी कर्मचारियों को बनाए रखना कंपनियों के लिए पहले की तुलना में अधिक महंगा हो जाएगा.
भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा असर क्यों
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,06,348 H-1B याचिकाएं मंजूर हुईं. इनमें 2,91,542 मंजूरियां मौजूदा रोजगार जारी रखने से जुड़ी थीं. इनमें 2,26,359 मंजूरियां भारतीय पेशेवरों को मिलीं, जो कुल H-1B एक्सटेंशन का लगभग 77.6 प्रतिशत है. इसी वजह से प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय कर्मचारियों पर पड़ सकता है.
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आईटी कंपनियों की बढ़ सकती है लागत
प्रस्ताव लागू होने पर बड़ी टेक और आईटी कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है. नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में लगातार रोजगार के लिए सबसे अधिक H-1B मंजूरियां Amazon को मिलीं. इसके बाद Tata Consultancy Services, Microsoft, Meta, Apple और Google का स्थान रहा. इन कंपनियों को वीजा नवीनीकरण पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है.
पहले भी आ चुका था ऐसा प्रस्ताव
यह नीति पूरी तरह नई नहीं है. वर्ष 2020 में भी अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने इसी तरह का नियम तैयार किया था, लेकिन अदालत में चुनौती मिलने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका. अब प्रशासन इसे नए सिरे से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अंतिम नियम आने वाले सप्ताहों में जारी हो सकता है.
सरकार ने क्या बताया उद्देश्य
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क से बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट सिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी. विभाग का अनुमान है कि इस व्यवस्था से हर वर्ष लगभग 157.3 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है. यह नियम केवल उन कंपनियों पर लागू होगा, जिनके अमेरिका में कम से कम 50 कर्मचारी हैं और जिनमें आधे से अधिक H-1B या L-1 वीजा धारक हैं.