नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने मौजूदा व्यवस्था को समय के अनुरूप बदलने की जरूरत बताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुधार अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है. इस बयान ने भारत जैसी उभरती वैश्विक शक्तियों की उम्मीदों को नई मजबूती दी है, जो लंबे समय से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग कर रही हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार न केवल जरूरी है बल्कि अनिवार्य हो चुका है. उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश आज अपने विशेषाधिकारों से चिपके रहना चाहते हैं, उन्हें भविष्य में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. गुतारेस ने कहा कि दुनिया इंतजार नहीं कर रही और संयुक्त राष्ट्र को भी बदलाव के लिए साहस दिखाना होगा.
फिलहाल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं. इन देशों को किसी भी अहम प्रस्ताव पर वीटो का अधिकार प्राप्त है. इसके अलावा परिषद में दस अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है. लंबे समय से यह ढांचा वैश्विक शक्ति संतुलन को सही तरीके से नहीं दर्शाने का आरोप झेल रहा है.
भारत वर्तमान में सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वह लगातार इस दिशा में प्रयास करता रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 2024 में संसद में कहा था कि भारत इस लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है. उनका कहना था कि भारत के पास स्थायी सदस्य बनने के सभी जरूरी मानदंड हैं और एक विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका स्वाभाविक होनी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव और उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक पहले ही भारत के योगदान की सराहना कर चुके हैं. उन्होंने भारत को संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक अहम हिस्सा बताया है. दुजारिक के अनुसार भारत बहुपक्षीय व्यवस्था का मजबूत समर्थक है और संयुक्त राष्ट्र में उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाता है. महासचिव और भारतीय सरकार के बीच संबंधों को भी सकारात्मक बताया गया है.
रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे कई प्रभावशाली देश अतीत में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं. भारत 2021 से 2022 तक अस्थायी सदस्य भी रह चुका है. इसके बाद से भारत ने सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने के लिए सुधारों की मांग और तेज कर दी है. गुतारेस का ताजा बयान इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.