भीषण ठंड में जंग पर ब्रेक? यूक्रेन में एक हफ्ते के सीजफायर के लिए तैयार हुए पुतिन, ट्रंप ने किया दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भीषण ठंड को देखते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में एक सप्ताह के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हो गए हैं.

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Kuldeep Sharma

यूक्रेन युद्ध के बीच मौसम एक अहम कारण बनकर सामने आया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अत्यधिक ठंड और जानलेवा तापमान को देखते हुए रूस ने अस्थायी रूप से हमले रोकने पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से यूक्रेन के शहरों पर हमले न करने का अनुरोध किया था. यह कथित सहमति ऐसे समय सामने आई है, जब यूक्रेन और रूस दोनों भीषण शीतलहर की चपेट में हैं.

ट्रंप का दावा: पुतिन ने मानी अस्थायी रोक

कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पुतिन से सीधे बातचीत कर यूक्रेन के शहरों पर हमले रोकने की अपील की थी. ट्रंप के अनुसार, पुतिन ने एक सप्ताह तक सैन्य कार्रवाई न करने पर सहमति जताई. ट्रंप ने इसे 'अच्छा और मानवीय कदम' बताया और कहा कि इस ठंड में मिसाइल हमले हालात को और खराब कर सकते थे.

भीषण ठंड बनी युद्ध रोकने की वजह

ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन इस समय असाधारण ठंड से जूझ रहा है. उन्होंने बताया कि ठंड इतनी ज्यादा है कि आम नागरिकों के लिए हालात बेहद कठिन हो गए हैं. ऐसे में लड़ाई जारी रखना हालात को और अमानवीय बना देता. ट्रंप के मुताबिक, इसी वजह से यह अस्थायी विराम जरूरी था, ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके.

यूक्रेन में क्या है ‘कोल्ड स्नैप’

कोल्ड स्नैप उस अचानक आई शीतलहर को कहा जा रहा है, जिसने यूक्रेन को जकड़ लिया है. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कई इलाकों में तापमान माइनस 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. यूक्रेनी हाइड्रोमौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि फरवरी की शुरुआत में तापमान और गिर सकता है.

कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ ठंड

कीव, चेर्निहीव, सूमी, पोल्टावा, खारकीव और अन्य क्षेत्रों में रात का तापमान माइनस 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तक गिरने की आशंका है. दिन में भी तापमान माइनस 15 से 22 डिग्री के आसपास रह सकता है. आपातकालीन सेवाओं ने लोगों को घरों में रहने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है.

रूस भी सर्दी की चपेट में

रूस में भी हालात अलग नहीं हैं. देश के सुदूर पूर्वी हिस्सों में बीते 60 वर्षों की सबसे भारी बर्फबारी दर्ज की गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ठंड आर्कटिक से आ रही ठंडी हवाओं की वजह से है, जिसका असर एक साथ रूस, यूक्रेन और एशिया के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है.