लोकतंत्र की मांग करने वाले UAE के 43 एक्टिविस्ट को आजीवन कारावास की सजा, जानें पूरा मामला

UAE Activists Life Sentence: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एक कोर्ट ने 43 एक्टिविस्ट को आतंकवादी अपराधों का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सरकारी मीडिया ने कहा कि आरोपियों को आतंकवादी संगठन बनाने का दोषी ठहराया है. संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों ने इस सामूहिक मुकदमे की कड़ी आलोचना की है.

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UAE Activists Life Sentence: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 43 एक्टिविस्ट को आबू धाबी की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. कहा जा रहा है कि ये सभी लोकतंत्र की मांग कर रहे थे. दरअसल, 80 से अधिक लोगों को 'आतंकवादी' संगठन शुरू करने के आरोप में कई साल पहले गिरफ्तार किया गया था. इनमें वकील, शिक्षाविद और एक्टिविस्ट शामिल थे. इन सभी को कई साल पहले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संदिग्ध मामलों में दोषी ठहराया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोषी ठहराए गए लोगों ने राजनीतिक सुधारों की मांग की थी. उन्हें उम्मीद थी कि वे जल्द ही जेल से रिहा हो जाएंगे, क्योंकि एक-एक करके उनकी सजा समाप्त हो गई थी.

लेकिन कैदियों के परिवारों को चौंका देने वाले एक कदम में, उन सभी पर फिर से मुकदमा चलाया गया, जिनमें से अधिकांश को बुधवार को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. दोषियों पर न्याय और गरिमा समिति नाम के एक 'आतंकवादी' संगठन शुरू करने का आरोप लगाया गया. अबू धाबी की एक अदालत ने उनमें से 10 को अतिरिक्त 10 से 15 साल की जेल की सजा सुनाई और 43 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

24 आरोपियों के खिलाफ मामलों को किया गया खारिज

अमीराती राज्य समाचार एजेंसी ने कहा कि अदालत ने 24 आरोपियों के खिलाफ़ मामलों को खारिज कर दिया और उनमें से एक को बरी कर दिया. लंदन में रह यूएई के अहमद अल नुआइमी ने कहा कि कोर्ट के फैसले ने चौंका दिया है. क्या सिर्फ लोकतंत्र की मांग करने से आजीवन कारावास की सजा हो जाती है? ये अस्वीकार्य और अकल्पनीय है.

उधर, कई मानवाधिकार समूहों ने भी 84 आरोपियों के खिलाफ़ सामूहिक मुकदमे के बारे में चिंता जताई थी. अब उन्होंने फैसले की निंदा की है. ह्यूमन राइट्स वॉच ने अन्य समूहों के साथ एक संयुक्त बयान में कहा कि मुकदमा मौलिक रूप से अनुचित था. अमीराती राज्य समाचार एजेंसी ने एक रिपोर्ट में कहा कि ये लोग अल इस्लाह नाम के एक स्थानीय इस्लामवादी समूह का हिस्सा थे, जो देश में हिंसक घटनाओं को बनाने और दोहराने के लिए काम करता था. एक दशक पहले अरब स्प्रिंग क्रांतियों का जिक्र करते हुए समाचार एजेंसी ने कहा कि इसने आतंक फैलाया था और राज्यों की संप्रभुता को खतरा पैदा किया था.

आधिकांश दोषी एक दशक से जेल में बंद

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने कहा कि 80 से अधिक मानवाधिकार रक्षकों और राजनीतिक असंतुष्टों को UAE 84 के रूप में जाना जाता है. इनमें से अधिकांश मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य हैं, जो एक इस्लामी आंदोलन है और जिसे 2014 से यूएई में आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है. इसकी स्थानीय सहयोगी अल-इस्लाह पार्टी पर भी प्रतिबंध है. एचआरडब्ल्यू और एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2013 में मुकदमे के तहत जेल भेजे जाने के बाद से अधिकांश दोषी एक दशक से अधिक समय से जेल में हैं. इनमें से कई लोगों की सजा भी पूरी हो चुकी थी.

सजा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल के डेविन केनी ने संयुक्त अरब अमीरात से इस गैरकानूनी फैसले को तत्काल रद्द करने का आग्रह किया तथा सजा पाए लोगों को रिहा करने का आह्वान किया. मिडिल ईस्ट के सबसे धनी देशों में से एक होने, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा देने के बावजूद यूएई राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंधात्मक रुख अपनाता है. 7 अमीरातों के संघ, जिसमें अबू धाबी और दुबई शामिल हैं, में कोई आधिकारिक विपक्ष नहीं है तथा राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध है. 2013 में, सरकार को उखाड़ फेंकने की कथित साजिश के लिए लगभग 70 इस्लामवादियों को जेल की सजा दी गई थी.