'बहुत गलत फैसला होगा', नूरी अल-मालिकी की वापसी पर ट्रंप की दो-टूक, इराक से अमेरिकी समर्थन खत्म करने का किया ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल‑मालिकी फिर से इराक का प्रधानमंत्री बनते हैं तो अमेरिका इराक को कोई समर्थन नहीं देगा. उन्होंने इसे 'बहुत गलत चुनाव' बताया.
नई दिल्ली: अमेरिका और इराक के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल‑मालिकी की संभावित प्रधानमंत्री पद की वापसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाया है. ट्रंप ने कहा है कि अगर अल‑मालिकी सत्ता में आते हैं तो अमेरिका इराक को समर्थन देना बंद कर देगा. ट्रंप ने इसे इराक के लिए 'बहुत बुरा निर्णय' बताया और अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी.
ट्रंप का कड़ा रुख
ट्रंप ने अपने Truth Social प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि अल‑मालिकी के पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी और अराजकता में डूब गया था. उन्होंने कहा कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अल‑मालिकी प्रधानमंत्री चुने गए तो अमेरिका इराक को समर्थन देना बंद कर देगा.
इराक का राजनीतिक परिदृश्य
अल‑मालिकी को इराक की संसद के सबसे बड़े शिया राजनीतिक समूह द्वारा प्रधानमंत्री के पद के लिए नामांकित किया गया है. यह कदम राजनीतिक गतिरोध के बीच आया है, क्योंकि मौजूदा प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल‑सुदानी एक ठोस सरकार नहीं बना पाए हैं. ट्रंप की चेतावनी इस राजनीतिक संघर्ष को और जटिल बनाती है.
यूएस‑इराक रिश्तों पर असर
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अल‑मालिकी की नीतियों और विचारधारा के कारण, अगर उन्हें फिर से सत्ता मिलती है तो अमेरिका इराक को समर्थन नहीं देगा. ट्रंप ने कहा कि बिना अमेरिकी सहायता के इराक को सफलता, समृद्धि या स्वतंत्रता के अवसर नहीं मिलेंगे.
ईरान के प्रभाव को लेकर चिंता
अमेरिका को इस बात की चिंता है कि अल‑मालिकी ईरान के प्रभाववादी समूहों के करीब हैं. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान समर्थित सरकार इराक को अमेरिका के हितों के खिलाफ निर्देशित कर सकती है और यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करेगा.
क्या हो सकते हैं परिणाम
ट्रंप की चेतावनी से इराक में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है. अगर अमेरिका समर्थन हटाता है, तो इराक को अपने तेल राजस्व, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक स्थिरता पर भारी प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है. इस स्थिति का असर पूरे मध्य पूर्व के राजनीतिक समीकरण पर भी पड़ सकता है.
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