नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल हो चुका है. इस ऐतिहासिक समझौते के बाद यूरोप के 27 देश और भारत के बीच मुक्त व्यापार होंगे. इस एग्रीमेंट का पहला ब्रेकडाउन जारी हो चुका है. सामने नजर आ रहा यह बदलाव भारत के इंपोर्ट मार्केट को अगले एक दशक में नया आकार देने वाली है.
इस डील के बाद सबसे ज्यादा ऑटो सेक्टर को बूम मिलने वाला है. भारत में अब यूरोपीय कारों पर टैरिफ हटेगा और इस ड्यूटी लोड से बहुत बड़ी गिरावट आने वालीहै. ट्रांज़िशन के दौरान सालाना 2,50,000 गाड़ियों का कोटा लागू होगा. EU का कहना है कि सिर्फ़ इससे ही भारत के प्रीमियम कार मार्केट को रीसेट किया जा सकता है. हालांकि इस डील से भारत को काफी कुछ मिलने की संभावना है.
भारत में आने वाले 90% से ज़्यादा EU सामानों से टैरिफ खत्म या कम कर दिया जाएगा. ब्रसेल्स को उम्मीद है कि यह एग्रीमेंट 2032 तक भारत में EU के एक्सपोर्ट को दोगुना कर देगा और ड्यूटी में सालाना 4 बिलियन यूरो तक की बचत होगी. मशीनरी पर अभी तक 44 प्रतिशत टैरिफ लगते थे. केमिकल्स पर 22% तक और फार्मास्यूटिकल्स पर लगभग 11% टैरिफ लगता है. इन सभी में ज्यादातर टैरिफ को खत्म कर दिया जाएगा. इसके अलावा एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर लगभग पूरी तरह से टैरिफ हटा दिया जाएगा. केमिकल्स में लगभग सभी प्रोडक्ट लाइनों पर ड्यूटी खत्म कर दिया जाएगा. वहीं ऑप्टिकल, मेडिकल और सर्जिकल इक्विपमेंट पर भी 90% प्रोडक्ट्स के लिए टैरिफ खत्म हो जाएंगे. जिससे भारत में अस्पतालों और डायग्नोस्टिक्स के लिए लागत कम हो सकती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को मदर ऑफ ऑल डील बताया है. इसी डील से खाने-पीने की चीजों को भी एक बड़ा रीसेट मिलेगा. यूरोपीय वाइनों पर भी 20-30% टैरिफ घटेगा, स्पिरिट्स पर 40% और बीयर पर 50% कर देगा. EU से आने वाले जैतून के तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर भी टैरिफ कम या खत्म करने की तैयारी है. वहीं सर्विस सेक्टर की बात करें तो EU ने फाइनेंशियल और समुद्री सेवाओं में खास एक्सेस हासिल किया है. ब्रसेल्स इसे एक ऐसे सेक्टर में एक बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहा है, जहां भारत पारंपरिक रूप से खोलने में धीरे-धीरे आगे बढ़ा है.
इतना ही नहीं EU ने अगले दो सालों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और जलवायु के अनुकूल निवेश को बढ़ावा देने के लिए भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए 500 मिलियन यूरो देने का भी वादा किया है. भारतीय व्यापार मंत्रालय की मानें तो इस डील में भारतीय समुद्री उत्पादों, चमड़े और कपड़ा उत्पादों, केमिकल्स, रबर, बेस मेटल्स, और रत्न और आभूषणों पर टैरिफ को शून्य करना शामिल है. भारत के लिए अब ध्यान इस बात पर है कि ऑटो, मशीनरी, केमिकल्स और मेडिकल डिवाइस जैसे सेक्टर्स में घरेलू कंपनियाँ कड़ी यूरोपीय प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करेंगी.