नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर हस्ताक्षर किए. यह कानून ट्रंप को चीन और भारत समेत उन देशों पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से तेल और गैस खरीदते हैं. इस कानून के तहत अमेरिका इन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है, जो बड़ी मात्रा में रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं.
बता दें कि भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए दोनों देशों पर इसका असर पड़ सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग जाएगा. कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार देता है कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए और उसकी दर कितनी हो.
कानून पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन इसके प्रावधान तुरंत लागू नहीं होते. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे लागू करने की प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर शुरू हो सकती है. कानून में रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदार देशों को निशाना बनाने की व्यवस्था है.
कानून में कुछ परिस्थितियों में गैस से जुड़े टैरिफ से छूट का प्रावधान भी है. अगर कोई देश का रूस से गैस आयात, रूस के कुल गैस निर्यात के 15 प्रतिशत से कम रहा हो और वह देश रूसी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा हो, तो उसे छूट मिल सकती है.
भारत अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है. ऐसे में नए अमेरिकी कानून से इंडिया-रूस ऑयल ट्रेड, इंडिया-यूएस ट्रेड और कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना पर नजर रहेगी. हालांकि, कानून राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार देता है और वास्तविक टैरिफ का फैसला आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा.