नाटो से नाता तोड़ने की तैयारी में ट्रंप, सैन्य संगठन को बताया 'कागजी शेर'; खतरे में यूरोप की सुरक्षा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संघर्ष में समर्थन न मिलने पर नाटो से हटने की धमकी दी है. उन्होंने इस गठबंधन को 'कागजी शेर' बताते हुए यूरोपीय देशों की रक्षा तैयारियों पर कड़े सवाल उठाए हैं.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार 'डेली टेलीग्राफ' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है. उन्होंने घोषणा की है कि वे अमेरिका को नाटो (NATO) सैन्य गठबंधन से बाहर निकालने पर अत्यंत गंभीरता से विचार कर रहे हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में नाटो के सदस्य देश सहयोग करने में विफल रहे हैं. ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं.

ट्रंप ने नाटो की वर्तमान स्थिति पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे एक 'कागजी शेर' करार दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस रक्षा समझौते से अमेरिका को बाहर निकालना अब केवल पुनर्विचार की बात नहीं है, बल्कि वे इस पर अडिग नजर आ रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्हें लंबे समय से इस गठबंधन की विश्वसनीयता पर संदेह रहा है. उनके अनुसार, गठबंधन अब अपनी उपयोगिता खो चुका है और पुतिन जैसे वैश्विक नेता भी इस कमजोरी से अच्छी तरह वाकिफ हैं.

ईरान युद्ध और सहयोगियों की बेरुखी 

ट्रंप की नाराजगी का मुख्य कारण ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य संघर्ष में नाटो देशों की निष्क्रियता है. अमेरिका को उम्मीद थी कि संकट की इस घड़ी में उसके सहयोगी देश एकजुट होकर साथ खड़े होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ट्रंप का मानना है कि जब अमेरिका इस गठबंधन के बजट में सबसे बड़ा योगदान देता है, तो उसे बदले में वैसा सहयोग नहीं मिल रहा है. इसी असंतोष ने उन्हें संस्थापक सदस्य होने के बावजूद नाटो छोड़ने के विचार पर मजबूर कर दिया है.

ब्रिटेन की सैन्य क्षमता पर कटाक्ष 

ट्रंप ने साक्षात्कार में ब्रिटेन की सैन्य शक्ति, विशेषकर उसकी नौसेना की वर्तमान स्थिति का मजाक उड़ाया. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के पास पर्याप्त नौसेना और आधुनिक विमान वाहक पोत भी नहीं हैं जो ठीक से काम कर सकें. ट्रंप ने सहयोगियों को पुराना और अक्षम बताते हुए आरोप लगाया कि वे अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सहयोगी देश केवल कागजी दावों तक सीमित हैं और युद्ध के मैदान में उनकी कोई उपस्थिति नहीं है.

यूरोपीय सुरक्षा और अनुच्छेद 5 का संकट 

नाटो का अनुच्छेद 5 'एक पर हमला, सभी पर हमला' की नीति पर आधारित है, जो यूरोपीय सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है. यदि अमेरिका इस गठबंधन से अलग होता है, तो यह सुरक्षा कवच पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा. यूरोपीय देशों के लिए अमेरिकी सैन्य समर्थन के बिना अपनी सीमाओं की रक्षा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा. नाटो के बजट और रणनीतिक नेतृत्व में अमेरिका की भूमिका इतनी बड़ी है कि उसके हटने का मतलब इस सैन्य गठबंधन का औपचारिक रूप से बिखर जाना हो सकता है.

नाटो का इतिहास

1949 में स्थापित नाटो का मूल उद्देश्य सोवियत संघ की आक्रामकता से उत्तरी अमेरिका और यूरोप को बचाना था. अमेरिका ने सात दशकों से इस संगठन का नेतृत्व किया है, लेकिन अब वह इससे दूरी बनाने की बात कर रहा है. वर्तमान में अमेरिका ही यूरोप की रक्षा रणनीति का मुख्य आधार है. यदि ट्रंप अपनी बात पर अमल करते हैं, तो यह न केवल दशकों पुराने गठबंधन का अंत होगा, बल्कि वैश्विक सैन्य संतुलन को भी रूस जैसे देशों के पक्ष में झुका देगा.