ट्रंप ने बढ़ाया शांति का हाथ, लेकिन क्या नेतन्याहू बदल देंगे पूरा खेल? जानिए ईरान डील पर क्यों लटक रही तलवार

अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है. जहां डोनाल्ड ट्रंप इस पहल को तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.

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Reepu Kumari

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए एक नए समझौते पर सहमति बनी है. इस कदम को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समझौते के बाद दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत का नया दौर भी शुरू हो गया है. हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर इजरायल संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि ईरान पर भरोसा करना आसान नहीं है. यही वजह है कि समझौते के बाद भी राजनीतिक और रणनीतिक बहस तेज हो गई है.

ईरान को लेकर पुराना रुख अब भी कायम

बेंजामिन नेतन्याहू कई वर्षों से ईरान को इजरायल की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते रहे हैं. उनका कहना रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है. नई डील के बाद भी उनका रुख नहीं बदला है. रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली नेतृत्व को आशंका है कि ईरान भविष्य में समझौते की सभी शर्तों का पालन नहीं करेगा. इसी कारण इजरायल इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं लगातार सामने रख रहा है.

अमेरिका में भी उठने लगे सवाल

समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. कुछ रिपब्लिकन नेताओं और विश्लेषकों ने इसके आर्थिक और सुरक्षा पहलुओं पर चिंता जताई है. उनका मानना है कि यदि ईरान को आर्थिक राहत मिलती है तो इसका असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है. कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते की आलोचना करते हुए सरकार से अतिरिक्त सावधानी बरतने की मांग की है.


लेबनान बना सबसे बड़ा सवाल

समझौते में लेबनान सहित कई मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां रोकने की बात कही गई है, लेकिन इसके लागू होने को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं. खास बात यह है कि इस समझौते पर अमेरिका और ईरान ने हस्ताक्षर किए हैं, जबकि इजरायल और लेबनान इसमें सीधे पक्ष नहीं हैं. ऐसे में जमीन पर इसके प्रभाव और पालन को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा जारी है.

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच दिखा नजरिए का अंतर

इस पूरे मुद्दे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के अलग-अलग दृष्टिकोण को भी उजागर किया है. ट्रंप क्षेत्र में स्थायी समाधान और बड़े संघर्ष को रोकने पर जोर दे रहे हैं. दूसरी ओर नेतन्याहू सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देते हुए सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं. यही अंतर आने वाले दिनों में इस समझौते की दिशा और भविष्य को प्रभावित कर सकता है.