ट्रंप की ईरान डील पर इजरायल को ऐतराज, मिडिल ईस्ट में फिर भड़क सकती है जंग?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ समझौते की पहल के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा. इजरायल की असहमति और जारी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंकाओं को फिर बढ़ा दिया है.

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Kuldeep Sharma

मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए अमेरिका की ओर से किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों को नई चुनौती मिलती दिखाई दे रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ तनाव कम करने और परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर किए गए समझौते के दावों के बावजूद क्षेत्र में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह इजरायल का कड़ा रुख है. इजरायल न केवल इस समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं है बल्कि उसने ईरान और उसके समर्थक संगठनों के खिलाफ अपने अभियान भी जारी रखे हुए हैं.

इजरायल को नहीं है समझौते पर भरोसा

अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रस्तावित समझौते का मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना और परमाणु गतिविधियों को नियंत्रित करना बताया जा रहा है. इसके तहत ईरान को कुछ आर्थिक राहत देने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल करने की बात कही गई है. हालांकि इजरायल का मानना है कि केवल कूटनीतिक समझौते से समस्या का समाधान नहीं होगा. तेल अवीव को आशंका है कि आर्थिक राहत मिलने के बाद ईरान फिर से अपनी सैन्य और परमाणु क्षमताओं को मजबूत कर सकता है. इसी वजह से इजरायल किसी भी ऐसे समझौते को अधूरा मान रहा है जिसमें ईरान के परमाणु ढांचे को पूरी तरह समाप्त करने की स्पष्ट व्यवस्था न हो.

सैन्य कार्रवाई से बढ़ी चिंता

अमेरिकी प्रयासों के समानांतर इजरायल ने अपनी सुरक्षा रणनीति में कोई नरमी नहीं दिखाई है. रिपोर्टों के अनुसार इजरायली सेना और खुफिया एजेंसियां ईरान से जुड़े ठिकानों और उसके समर्थित समूहों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे हुए हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख भी स्पष्ट है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में इजरायल किसी बाहरी दबाव के आधार पर निर्णय नहीं लेगा. विश्लेषकों का मानना है कि लगातार जारी ये हमले अमेरिका की शांति पहल के सामने बड़ी चुनौती बन सकते हैं और इससे दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ सकता है.


क्षेत्र में फिर मंडरा सकता है युद्ध का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और अमेरिका के दृष्टिकोण में तालमेल नहीं बनता तो हालात और जटिल हो सकते हैं. इजरायली हमलों के जवाब में यदि ईरान कोई बड़ा कदम उठाता है तो पूरे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष छिड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. दूसरी ओर यदि ईरान को यह महसूस होता है कि समझौते के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई जारी है तो वह भी पीछे हट सकता है. ऐसे हालात में शांति स्थापित करने की कोशिशें कमजोर पड़ सकती हैं और मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर सकता है.