'टाल नहीं सकते, आकर ही रहेगी अगली महामारी...', आखिर क्यों डरा रहे हैं वैज्ञानिक?

Another Pandemic Warning: दुनिया के ऊपर एक और महामारी का खतरा मंडरा रहा है. ब्रिटेन के एक टॉप साइंटिस्ट ने आगाह किया है कि विश्व एक नई महामारी के मुहाने पर खड़ा है. इसे बचने के लिए यदि कठोर उपायों को लागू न किया गया तो परिणाम बेहद भयानक होंगे.

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Another Pandemic Warning: दुनिया को कोरोना वायरस से उबरे अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है और एक दूसरी महामारी कहर मचाने के लिए सिर पर आ खड़ी हुई है. ब्रिटेन के टॉप साइंटिस्ट ने दावा किया कि एक और महामारी की दुनिया में दस्तक होने वाली है, जिसे टाला नहीं जा सकता है. ब्रिटिश सरकार के पूर्व चीफ साइंटिफिक एडवाइजर सर पैट्रित वालेंस ने यूके सरकार से इस महामारी से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को दुरुस्त करने का आग्रह किया है. 

बेहतर तरीके से हो निगरानी 

ब्रिटिश समाचार पत्र दल गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, वालेंस ने कहा कि यूके सरकार इस महामारी से निपटने के लिए तैयार नहीं है, इसलिए हमें इसकी अभी से तैयारियां करनी होंगी. पावेस आयोजित हे फेस्टिवल के पैनल कार्यक्रम में बोल रहे थे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर तरीके से निगरानी करके ही इस महामारी के खतरे को कम किया जा सकता है.  इस दौरान उन्होंने महामारी से बचने के लिए कुछ उपायों के बारे में भी बताया. 

कठोर उपायों की होगी जरूरत 

इस दौरान उन्होंने इस महामारी से बचने के लिए कोरोना वायरस के समय उठाए गए उपचार कदमों के उपाय भी सुझाए. उनका कहना था कि जिस तरह कोविड-19 वायरस को रोकने में वैक्सीनेशन कार्यक्रम, टेस्ट और लगातार निगरानी कार्यक्रम चलाए गए ठीक उसी तरह इस महामारी को रोकने के लिए हमें पहले से ही इस तरह के कठोर उपायों को लागू करना होगा. 

महामारी का नहीं होगा कोई संकेत 

 गार्जियन के हवाले से उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि हमें सेना की ज़रूरत है इसलिए नहीं कि इस साल कोई युद्ध होने वाला है बल्कि हम जानते हैं कि एक राष्ट्र के तौर पर हमें इसकी ज़रूरत है.  हमें इस तैयारी को उस महामारी के खिलाफ करना चाहिए जो हमें नुकसान पहुंचा सकती है. उन्होंने कहा कि महामारी आने का कोई संकेत नहीं होगा ऐसे में हमें अपनी तैयारियों को मजबूत रखना होगा. 

कोरोना ने घटा दी उम्र

पिछले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने कहा था कि कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर के लोगों की जीवन प्रत्याशा दो साल कम हो गई है, इस कारण वैश्विक प्रगति में दस साल को नुकसान हुआ है.