दुनिया के सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप ने खींची सूरज की अब तक की सबसे करीबी तस्वीरें
दुनिया के सबसे शक्तिशाली सौर टेलीस्कोप ने सूर्य की सतह की अभूतपूर्व तस्वीरें ली हैं. इससे अंतरिक्ष मौसम, सौर विस्फोट और सूर्य की ऊर्जा प्रणाली को बेहतर समझने में मदद मिलेगी.
वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली सौर टेलीस्कोप की मदद से सूर्य की सतह की अब तक की सबसे विस्तृत और स्पष्ट तस्वीरें कैद की हैं. इन तस्वीरों में पहली बार सूर्य की सतह पर बनने वाले विशाल "भंवर" (Whirlpools) दिखाई दिए हैं. यह उपलब्धि खगोल विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जा रही है और इससे सूर्य की आंतरिक गतिविधियों को पहले से कहीं बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा.
चुंबकीय ऊर्जा का रहस्य आया सामने
अमेरिका स्थित नेशनल सोलर ऑब्जर्वेटरी (NSO) के वैज्ञानिकों के अनुसार ये भंवर सूर्य की सतह पर मौजूद अत्यधिक गर्म गैसों की गति से बनते हैं, जो उसके चुंबकीय क्षेत्र को लगातार मोड़ती और बदलती रहती हैं. इसी प्रक्रिया से चुंबकीय ऊर्जा जमा होती है और बाद में शक्तिशाली सौर विस्फोटों का रूप ले सकती है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यही गतिविधियां अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की प्रमुख वजह हैं.
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धरती पर भी पड़ सकता है असर
अंतरिक्ष मौसम केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पृथ्वी पर भी महसूस किया जाता है. तेज़ सौर विस्फोट बिजली ग्रिड, संचार प्रणाली, जीपीएस, उपग्रहों और अंतरिक्ष मिशनों को प्रभावित कर सकते हैं. अंतरिक्ष में काम कर रहे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी यह खतरा पैदा कर सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य की इन सूक्ष्म गतिविधियों को समझने से भविष्य में ऐसे खतरों का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा.
हवाई के पर्वत पर मौजूद टेलीस्कोप से मिली सफलता
यह महत्वपूर्ण खोज प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित हुई है. इसके लिए हवाई द्वीप के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में स्थापित इनोये सोलर टेलीस्कोप का उपयोग किया गया, जहां धूल रहित साफ आसमान उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें लेने में मदद करता है. वैज्ञानिकों ने सूर्य की सतह पर बनने वाले घूमते हुए भंवरों का बेहद सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन किया और पाया कि ये ऊर्जा को ऊपरी परतों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
आइंस्टीन के सिद्धांत से लेकर भविष्य की खोजों तक
शोधकर्ताओं के अनुसार सूर्य केवल पृथ्वी को ऊर्जा देने वाला तारा नहीं, बल्कि भौतिकी के मूलभूत नियमों को समझने की एक अनोखी प्रयोगशाला भी है. वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्य पर होने वाली ऐसी खोजें अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी को अधिक सटीक बनाएंगी. साथ ही यह भी याद दिलाती हैं कि आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत का पहला प्रयोगात्मक प्रमाण भी सूर्य ग्रहण के अध्ययन से ही मिला था. ऐसे प्रयोग भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान और मानव ज्ञान दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.