मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान ने दी बड़ी राहत, इन जहाजों को दी होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की अनुमति

ईरान ने अपने बंदरगाहों के लिए जरूरी सामान ला रहे जहाजों हेतु होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है. युद्ध के बीच सप्लाई चेन सुधारने हेतु जहाजों को ईरानी अधिकारियों से संपर्क कर सुरक्षित गुजरने की इजाजत मिली है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग ने वैश्विक सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. कच्चे तेल और गैस की कमी से भारत जैसे देशों को भारी नुकसान हुआ है. इस गंभीर संकट के बीच ईरान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने बंदरगाहों के लिए जरूरी सामान ला रहे जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है. ईरानी मीडिया के अनुसार, यह निर्णय समुद्री रास्तों पर फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लिया गया है.

ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि छूट केवल ईरान के बंदरगाहों की ओर आने वाले जहाजों को मिलेगी. जहाजों को स्ट्रेट पार करने से पहले ईरानी अधिकारियों से अनिवार्य रूप से बातचीत करनी होगी. ओमान की खाड़ी में खड़े जहाजों को भी इस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले लगातार जारी हैं, जिससे सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं.

नाकेबंदी का वैश्विक और घरेलू प्रभाव 

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था. इस समुद्री रास्ते के बंद होने से न केवल भारत जैसे देशों में कच्चे तेल की कमी हुई, बल्कि खुद ईरान को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा. वहां भी जरूरी सामान की आवक रुक गई थी. वर्तमान में 2000 से अधिक जहाज इस नाकेबंदी के कारण फंसे हुए हैं. तेहरान का यह ताजा ऐलान खुद अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की एक कोशिश है.

भारत और अन्य देशों की चुनौतियां 

भारत के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि पिछले एक महीने में भारत सरकार केवल छह जहाजों को ही वहां से सुरक्षित निकालने में सफल रही है. अभी भी एक दर्जन से ज्यादा भारतीय हितों वाले जहाज इस समुद्री गलियारे के पास फंसे हुए हैं. होर्मुज का रास्ता बंद होने से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. ईरान अब केवल अपने सहयोगियों या तटस्थ देशों के जहाजों को ही निकलने की सीमित इजाजत दे रहा है.

युद्ध का मैदान और सामरिक स्थिति 

युद्ध के मैदान में स्थिति काफी जटिल हो गई है. ईरान की ओर से छोड़े गए हल्के ड्रोन्स ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मचा दी है. अमेरिका और इजरायल, जो ईरान में सत्ता परिवर्तन का ख्वाब देख रहे थे, अब खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. वाशिंगटन को विमानों और सैन्य साजो-सामान का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. हाल ही में ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स को मार गिराने का दावा किया है, जिससे अमेरिकी रक्षा क्षमताओं पर सवाल खड़े हुए हैं.