पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के बाद अब Internet पर भी संकट! ईरान के इस नए हथियार से कैसे लड़ेंगे ट्रंप?
ईरान की ओर से अब नई चेतावनी दी गई है. IRGC का कहना है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछे इंटरनेट केबल के इस्तेमाल पर भी शुल्क लेगा. वहीं जो इस शुल्क को नहीं देता है उसे परेशानी उठानी पड़ सकती है.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया को अपने चपेट में ले लिया है. इस तनाव की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है. जिसके कारण महंगाई आसमान छू रही है. अब ईरान एक नया दांव खेलने की तैयारी में है.
ईरान ने साफ कहा है कि वह इस अहम जलमार्ग के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों का इस्तेमाल करने के लिए शुल्क लेने पर विचार कर रहा है. उनका कहना है कि यह केवल खाड़ी के आसपास के देशों को सेवा देती है, जिसमें कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी शामिल हैं. इन सभी देशों को अब इसका भी टैक्स देना पड़ सकता है.
क्या प्लान कर रहा ईरान?
इस जंग के माहौल के बीच ईरान ने इन टोल से गुजरने वाले जहाजों से भी शुल्क लेना शुरू कर दिया है. इसके बाद अब ईरान की ओर से अब यह धमकी दी जा रही है कि अगर कंपनियां समुद्र के नीचे की केबलों का इस्तेमाल करती हैं और शुल्क नहीं देती हैं तो इससे उनका ट्रैफिक बाधित हो सकता है.
ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागारी ने पिछले हफ्ते एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि हम इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाएंगे. ईरानी मीडिया का कहना है कि अब बनाए जा रहे इस नए नियम का पालन गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी बड़ी कंपनियों को भी करना पड़ेगा. जानकारी के मुताबिक सभी टेक कंपनियों को यहां से केबल गुजराने के लिए लाइसेंस फीस देनी होगी और इसकी मरम्मत और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ईरानी कंपनियों को दी जाएगी.
ईरान के इस नई धमकी का कितना होगा असर?
ईरान द्वारा किए जा रहे इन नए दावों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वह ऐसा कर सकते हैं या नहीं. लेकिन उनके द्वारा दी जा रही नई चेतावनी ने एक नए चिंता का कारण दिया है. ईरान दिन-प्रतिदिन खुद को और भी ज्यादा मजबूत दर्शाने की कोशिश कर रहा है. जिन्हें नहीं मालूम उन्हें बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कई देश व्यापार तो करते ही हैं, वहीं इसके नीचे बिछे केबलों के जरिए फाइबर ऑप्टिक से दुनिया भर में इंटरनेट भेजा जाता है.
डिजिटल तकनीकों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी ITU के मुताबिक ये समुद्र के नीचे की केबलें वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा ले जाती हैं. ऐसे में आज की इस डिजिटल दुनिया में इस केबल का काफी ज्यादा महत्व है और अगर इसपर कोई भी असर पड़ता है, दुनिया जहां है वहीं रुक सकती है. हालांकि ईरान के लिए ऐसा करना उतना आसान नहीं है.