South Africa Election: अफ्रीकन नेशनल कॉंग्रेस (ANC) दशकों बाद अपनी सत्ता गंवाती दिख रही है. कहा जा रहा है तीन दशकों से सत्ता में रही अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस सत्ता से जाती दिख रही है. दक्षिण अफ्रीका में नया राष्ट्रपति चुनने के लिए 29 मई को मतदान हुआ था. अफ्रीका के गांधी नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में साल 1994 में पहली बार लोकतांत्रिक सरकार का चुनाव हुआ था. एएनसी तब से दक्षिण अफ्रीका में सरकार चला रही है, लेकिन इस बार के चुनावी नतीदों में वह पिछड़ती नजर आ रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में किसी भी पार्टी को अपनी सरकार बनाने के लिए कम से कम 50 फीसदी मतदान की आवश्यकता होती है. एएनसी को इस बार मात्र 41.88 फीसदी ही वोट मिले हैं. इन नतीजों के बाद वह अकेले खुद की दम पर सरकार का गठन करने में सक्षम नहीं है. चुनाव में दूसरे स्थान पर डेमोक्रेटिक अलायंस रहा. इसे चुनाव में 23.22 फीसदी मत हासिल हुए हैं.वहीं, जैकब जुमा की पार्टी MKP को अफ्रीकी जनता वे 11.52 फीसदी वोट दिए हैं.एएनसी को सरकार बनाने के लिए अब गठबंधन की जरूरत होगी.
पिछले चुनाव में एएनसी ने नेशनल असेंबली के चुनाव में 230 सीटें हासिल की थीं. इस पार्टी ने कुल 57.5 फीसदी मत हासिल किए थे. वहीं, दूसरे नंबर की पार्टी डेमोक्रेटिक अलायंस रही थी. दक्षिण अफ्रीका में नेशनल असेंबली में कुल सीटों की संख्या 400 है. रिपोर्ट के अनुसार, साउथ अफ्रीकी इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी समर में उतरे थे. मतदान के लिए यहां 23 हजार मतदान केंद्र बनाए गए थे.
नेल्सन मंडेला ने महात्मा गांधी द्वारा बनाई गई नेटाल इंडियन कांग्रेस से प्रेरित होकर 8 जनवरी 1912 को साउथ अफ्रीका नेशनल कांग्रेस की स्थापना की थी. इसका प्रमुख मकसद काले लोगों को बराबरी दिलाना था. साल 1948 से लेकर साल 1990 तक इस पार्टी ने रंगभेद के खिलाफ जमकर आवाज उठाई. इस दौरान कई बार पार्टी के ऊपर पाबंदियां भी लगाई गईं. रंग भेद के खात्मे के बाद 90 के दशक में सरकार का गठन हुआ. इस पार्टी को सत्ता में लाने वाले नेल्सन मंडेला ही थे.