हिमालयी क्षेत्रों से बर्फबारी गायब लेकिन सहारा के रेगिस्तान बर्फ से लदे, वैज्ञानिकों ने बताई क्या है इस करिश्मे की वजह?

जनवरी 2026 में सहारा रेगिस्तान में बर्फबारी ने दुनिया को चौंका दिया. अल्जीरिया और सऊदी अरब के कुछ इलाकों में ठंड और नमी के मेल से यह दुर्लभ नजारा देखने को मिला.

Anuj

नई दिल्ली: सहारा रेगिस्तान का नाम आते ही भीषण गर्मी, तपता रेत और सूखी हवाओं की तस्वीर सामने आती है. लेकिन जनवरी 2026 में यह धारणा टूट गई, जब उत्तरी अल्जीरिया में सहारा के किनारे बर्फबारी देखने को मिली. रेत के टीलों पर जमी सफेद बर्फ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए. यह नजारा जितना खूबसूरत था, उतना ही चौंकाने वाला भी, क्योंकि दुनिया के सबसे गर्म रेगिस्तान में बर्फ गिरना बेहद दुर्लभ है.

सहारा में बर्फबारी का अनोखा दृश्य

यह दुर्लभ घटना अल्जीरिया के ऐन सेफ्रा इलाके में देखी गई, जिसे सहारा का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. 17 जनवरी के आसपास यहां के सुनहरे टीलों पर सफेद बर्फ की चादर बिछ गई. स्थानीय लोगों ने पहली बार ऐसा दृश्य इतने साफ रूप में देखा. रेत और बर्फ का मेल किसी सपने जैसा लग रहा था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. 

अचानक बदला मौसम

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बर्फबारी की मुख्य वजह यूरोप और भूमध्यसागर की ओर से आई ठंडी हवाएं थीं. सर्दियों में कभी-कभी बेहद ठंडी हवा दक्षिण की ओर बढ़ जाती है. जनवरी के मध्य में ऐसी ही ठंडी लहर उत्तरी अफ्रीका तक पहुंची, जिससे तापमान शून्य के आसपास चला गया और बर्फ गिरने की स्थिति बन गई.

नमी और पहाड़ों की भूमिका

सहारा में आमतौर पर नमी बहुत कम होती है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होती. अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर से आई नमी जब एटलस पर्वतों से टकराई, तो हवा ऊपर उठी और तेजी से ठंडी हो गई. इस प्रक्रिया में पानी की बूंदें बर्फ के कणों में बदल गईं और जमीन पर बर्फ के रूप में गिरने लगी.

पहले भी दिख चुका है ऐसा नजारा

ऐन सेफ्रा में बर्फबारी पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले 1979, 2018, 2021 और 2023 में भी यहां हल्की बर्फ देखी गई थी. हालांकि, ऐसी घटनाएं कुछ घंटों या एक-दो दिन में खत्म हो जाती हैं. तेज धूप में बर्फ जल्दी पिघल जाती है और कई बार रेत के साथ मिलकर हल्के नारंगी रंग की दिखाई देती है.

क्या जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा. लेकिन यह जरूर माना जा रहा है कि आर्कटिक क्षेत्र के गर्म होने से हवा की धाराओं में बदलाव आ रहा है. इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में असामान्य ठंड और गर्मी देखने को मिल रही है.

सऊदी अरब में भी बर्फ का असर

इसी दौरान सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों, खासकर तबूक प्रांत में भी बर्फबारी देखी गई. जबल अल लॉज और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया. यहां ऊंचाई ज्यादा होने के कारण नमी बर्फ में बदल गई. बर्फ में चलते ऊंटों की तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनीं. यह दिखाता है कि रेगिस्तानी इलाकों में मौसम कितनी तेजी से बदल सकता है.