'हम भारत के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं लेकिन हसीना...' ऐसा क्यों बोली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार?
India Bangladesh Relation: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेशी मामलों के सलाहकार ने बुधवार को पहली बार भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया और साथ काम करने की इच्छा जताई. हालांकि इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए बयानों पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह बयान दोनों देशों संबंधों के अनुकूल नहीं हैं.
India Bangladesh Relation: पड़ोसी देश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने बुधवार को कहा कि ढाका की अंतरिम सरकार नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करना चाहती है लेकिन बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में दिए गए हालिया बयान इसके लिए अनुकूल नहीं हैं. हुसैन ने ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा से मुलाकात के बाद यह बयान दिया. हसीना के भारत जाने और अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद यह पहली बार था जब भारतीय राजनयिक ने बांग्लादेश सरकार के प्रतिनिधि से मुलाकात की.
हुसैन ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश सीमा पर हत्याओं को रोकने, तीस्ता जल बंटवारा समझौते को पूरा करने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार ने कहा कि अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों सहित विभिन्न समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
अंतरिम सरकार के प्रमुख
शेख हसीना अपनी अवामी लीग नीत सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त को बांग्लादेश छोड़कर चली गई थीं. इसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस ने 8 अगस्त को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला.
राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने की मांग
5 अगस्त के बाद अपने पहले बयान में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ने मंगलवार को पिछले महीने सरकार विरोधी प्रदर्शन में जिम्मेदार लोगों की जांच करने और न्याय के कटघरे में लाने की मांग की थी. इस दौरान उन्होंने लोगों से 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाने का आग्रह किया था. यह उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की हत्या की सालगिरह है.
अल्पसंख्यकों पर बढ़ी घटनाएं
अवामी लीग सरकार के पतन के बाद, बांग्लादेश के कई हिस्सों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ सामने आई हैं. भीड़ द्वारा हिंदुओं के घरों, व्यवसायों और मंदिरों को निशाना बनाए जाने के कारण एक स्कूल शिक्षक की मौत हो गई और कम से कम 45 लोग घायल हो गए हैं.