रूस पर चढ़ा हमेशा जवान रहने का बुखार, 2.47 लाख करोड़ रुपए से शुरू किया ये स्पेशल प्रोजेक्ट
साथ ही रूस ट्रांसप्लांट के लिए लैब में मानव अंग बनाने पर भी रिसर्च कर रहा है. अगर रूस का यह प्रयोग सफल रहा तो स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आ सकती है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर 74 साल की उम्र में अजर (कभी बूढ़ा ना होना) होने का भूत सवार हो गया है. यही वजह है कि रूस की सरकार इन दिनों एंटी-एजिंग पर रिसर्च कर रही है.
2.47 लाख करोड़ रुपए से शुरू हुआ प्रोजेक्ट
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बढ़ती उम्र को रोकने के लिए 26 अरब डॉलर यानी करीब 2.47 लाख करोड़ रुपए की लागत से बड़ा सरकारी प्रोजेक्ट शुरू किया है. सरकार दावा कर रही है कि इस मिशन से उम्र बढ़ने का प्रोसेस धीमा हो जाएगा. रूसी सरकार का कहना है कि इससे दशक के आखिर तक करीब 1.75 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है. इस प्रोजेक्ट को न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज नाम दिया गया है. इस प्रोजेक्ट के तहत लैब में इंसानों के अंग तैयार करना, जीन थेरेपी और बहुत कम तापमान वाली क्रायोथेरेपी जैसी तकनीक पर काम किया जाएगा.
एंटी एजिंग के लिए चार तकनीकों पर होगी रिसर्च
जीन थैरेपी- इंसान के डीएनए या जीन को बदलकर उपचार करने की कोशिश
3D बायोप्रिंटिंग- जीवित कोशिकाओं की मदद से अंगों और टिश्यू जैसे हिस्सों की प्रिंटिंग करना.
पेप्टाइड थेरेपी- शरीर में कोशिकाओं को काम करने का सिग्नल देने वाले प्रोटीन जैसे सिंथेटिक कंपाउंड का इस्तेमाल होगा.
क्रायो थेरेपी- शरीर को कुछ देर तक बहुत ही ठंडे तापमान पर रखकर कोल्ड थेरेपी देना.
एंटी एजिंग रिसर्च पर रूस गंभीर
बता दें कि पुतिन को भी लंबे समय से जेफ बेजोस, सैम ऑल्टमैन और पीटर थील जैसे सिलिकॉन वैली के अरबपतियों की तरह एंटी-एजिंग रिसर्च में गहरी दिलचस्पी रही है. उनको देखकर लगता है कि रूस इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी गंभीर है.
अप्रैल 2026 में रूस की सरकार ने ऐलान किया था कि वैज्ञानिक एक जीन थेरेपी उपचार विकसित कर रहे हैं जिसका मकसद स्वास्थ्य संरक्षण तकनीकों के हिस्से के रूप में कोशिकाओं से बढ़ने वाली उम्र को धीमा करना है. उप-विज्ञान मंत्री डेनिस सेकिरिंस्की ने 23 अप्रैल को दावा किया था कि यह दवा बढ़ापे के खिलाफ लड़ाई में अहम रोल निभाएगी.
लैब में मानव अंग बनाने की तैयारी
साथ ही रूस ट्रांसप्लांट के लिए लैब में मानव अंग बनाने पर भी रिसर्च कर रहा है. अगर रूस का यह प्रयोग सफल रहा तो स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आ सकती है.