US Israel Iran War

सुलह कराने में फेल हुआ पाकिस्तान, अब पुतिन संभालेंगे कमान, की ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश

पुतिन के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार मान रहे हैं कि रूस अब खुद को मध्य पूर्व में एक बड़े शांति दल के रूप में पेश करना चाहता है. अमेरिका के लिए यह एक चुनौती भी है और अवसर भी.

@BRICSinfo
Sagar Bhardwaj

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के विफल हो गई. इसके तुरंत बाद कूटनीतिक घटनाक्रम में एक नया मोड़ आया. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्वयं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को फोन किया. इस टेलीफोन वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने इस्लामाबाद में हुई असफल बातचीत की विस्तृत समीक्षा की. पुतिन ने साफ कर दिया कि रूस मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए हरसंभव मदद देने को तैयार है. आइए जानते हैं पूरा मामला.

 पुतिन ने बढ़ाया मध्यस्थता का हाथ

रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के अनुसार, पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से कहा कि रूस इस क्षेत्र में स्थायी और राजनीतिक समाधान के लिए अपनी सुविधाएं देने को तैयार है. पुतिन ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक तरीकों से संघर्ष सुलझाने पर जोर दिया. गौरतलब है कि पिछले कई हफ्तों से ईरान और अमेरिका के बीच सीधी वार्ता चल रही थी, लेकिन दोनों पक्ष आपसी शर्तों को लेकर आमने-सामने हैं. पुतिन ने पहले भी जारी हिंसा पर चिंता जताई थी. अब वह खाड़ी देशों के साथ मिलकर एक व्यापक शांति पहल की कोशिशों में जुट गए हैं. यह कदम अमेरिका के लिए भी किसी राहत से कम नहीं है.

 यूक्रेन में युद्धविराम पर नए आरोप-प्रत्यारोप

जहां एक तरफ पुतिन मध्य पूर्व में शांति की बात कर रहे हैं, वहीं यूक्रेन मोर्चे पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. रूस ने रविवार को यूक्रेन पर ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर घोषित 32 घंटे के युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि महज 16 घंटों में यूक्रेनी सेना ने लगभग 2,000 बार युद्धविराम तोड़ा. मंत्रालय के मुताबिक, यूक्रेन ने पोक्रोव्स्कोये, गाई और ओत्रादनोये बस्तियों में रूसी ठिकानों पर कई हमले किए. हालांकि रूसी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया. वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन ने भी पलटकर रूस पर 2,299 बार युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है.

हिजबुल्लाह ने इजरायली ठिकानों को बनाया निशाना

मध्य पूर्व में सिर्फ ईरान-अमेरिका ही नहीं, बल्कि इजरायल और लेबनान के बीच भी तनाव चरम पर है. लेबनान स्थित हिजबुल्लाह संगठन ने इजरायली सेना पर दो बड़े हमलों का दावा किया है. पहले हमले में हिजबुल्लाह ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के तायबेह शहर में एक इजरायली सैन्य वाहन को ड्रोन से निशाना बनाया. संगठन के मुताबिक, इस वाहन में कमांड टीम सवार थी. दूसरे हमले में उत्तरी इजरायल के किर्यात शमोना बैरक पर कई ड्रोन दागे गए. हिजबुल्लाह ने साफ किया है कि ये हमले इजरायल द्वारा लगातार किए जा रहे उल्लंघनों के जवाब में किए गए हैं. इससे पूरे क्षेत्र में एक और मोर्चा खुलता दिख रहा है.

क्या शांति कराने में सफल हो पाएगा रूस

पुतिन के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार मान रहे हैं कि रूस अब खुद को मध्य पूर्व में एक बड़े शांति दल के रूप में पेश करना चाहता है. अमेरिका के लिए यह एक चुनौती भी है और अवसर भी. अगर रूस सफल मध्यस्थता करता है, तो वैश्विक मंच पर उसकी साख बढ़ेगी. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ईरान और अमेरिका रूस की मध्यस्थता को स्वीकार करेंगे या नहीं. फिलहाल इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद पुतिन का यह कदम कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या नए समीकरण बनते हैं.