भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ अब एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे. Global Arbitration Review की रिपोर्ट के हवाले से बार एंड बेंच (Bar and Bench) ने बताया कि चंद्रचूड़ यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक और रूस के बीच चल रही अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में रूस की ओर से नियुक्त किए गए हैं.
यह मामला रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूक्रेनी बैंक की संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को हुए कथित नुकसान से जुड़ा है. ओशचाडबैंक का दावा है कि रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद उसे यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में मौजूद महत्वपूर्ण संपत्तियों और कारोबार का नुकसान उठाना पड़ा.
Russia Chooses Former Indian CJI D.Y. Chandrachud For High-Stakes Ukraine Bank Arbitration
— RT_India (@RT_India_news) August 12, 2026
Former Chief Justice of India D.Y. Chandrachud has been appointed by Russia as its arbitrator in a treaty dispute brought by Ukrainian state-owned Oschadbank, Bar & Bench reported.
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यह विवाद रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल में सुना जा रहा है. ओशचाडबैंक का दावा सैकड़ों मिलियन डॉलर का बताया जा रहा है. बैंक का कहना है कि फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में उसकी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं.
मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल करेगा. कोस्टा रिका की मध्यस्थ और पूर्व व्यापार मंत्री डायला जिमेनेज को रूस और ओशचाडबैंक ने संयुक्त रूप से ट्रिब्यूनल का अध्यक्ष चुना है. वहीं, ओशचाडबैंक की ओर से ग्रीक मध्यस्थ और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को नियुक्त किया गया है. वहीं रूस की ओर से डीवाई चंद्रचूड़ इस केस को लड़ेंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने पहले भी चंद्रचूड़ से कुछ संधि विवादों में मध्यस्थ बनने का आग्रह किया था. इनमें ऊर्जा कंपनी Wintershall Dea और यूक्रेन की सरकारी बिजली कंपनी Ukrenergo से जुड़े मामले शामिल थे. हालांकि, उस समय चंद्रचूड़ ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था. Wintershall मामले में नियुक्ति संबंधी संवाद सामने आने के बाद उन्होंने अपनी भूमिका छोड़ दी थी.
ओशचाडबैंक का रूस के खिलाफ यह पहला कानूनी विवाद नहीं है. क्रीमिया के 2014 में रूस द्वारा विलय के बाद बैंक की संपत्तियों और क्रीमिया शाखा के कथित अधिग्रहण से जुड़े एक अलग मामले में ट्रिब्यूनल ने बैंक के पक्ष में करीब 1.1 अरब डॉलर का मुआवजा दिया था, जिसमें बाद में ब्याज भी जुड़ा.
ओशचाडबैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद संबंधी नोटिस भेजा था. बैंक के मुताबिक रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने के बाद उसने मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की. बैंक ने कहा है कि वह 2022 के बाद हुए सभी नुकसान का दस्तावेजीकरण कर रहा है, ताकि कानूनी प्रक्रिया के जरिए उनकी भरपाई का दावा किया जा सके. चंद्रचूड़ की नियुक्ति इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कानूनी क्षेत्र में और महत्वपूर्ण बना देती है.