अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच पुतिन सरकार का बड़ा एक्शन, 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर लगाई रोक; जानें क्या पड़ेगा इसका भारत पर असर

रूस ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 1 अप्रैल से पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है. वहीं भारत ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त ईंधन भंडार है और सप्लाई फिलहाल सुरक्षित है.

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Km Jaya

नई दिल्ली: रूसी सरकार ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह 1 अप्रैल से गैसोलीन यानी पेट्रोल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगी. इसका उद्देश्य घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देना और ईंधन की कीमतों को स्थिर करना है, ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार संकट में है.

रूसी संघ की सरकार द्वारा जारी एक बयान में उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे संकट के कारण वैश्विक तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है. हालांकि उन्होंने कहा कि विदेशों में रूसी ऊर्जा की मांग मजबूत बनी हुई है.

कब हुई ये घोषणा?

यह घोषणा नोवाक की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद की गई, जिसमें घरेलू पेट्रोलियम उत्पाद बाजार की स्थिति की समीक्षा की गई थी. बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा निर्धारित उस लक्ष्य पर विशेष जोर दिया गया, जिसके तहत घरेलू ईंधन की कीमतों को अनुमानित स्तरों से ऊपर बढ़ने से रोकना है.

रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने क्या बताया?

रूसी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि तेल शोधन दरें मार्च 2025 के स्तरों के अनुरूप बनी हुई हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति स्थिर बनी हुई है. साथ ही उद्योग की कंपनियों के पास आंतरिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त गैसोलीन और डीज़ल भंडार के साथ-साथ उच्च रिफाइनरी क्षमता का उपयोग भी उपलब्ध है.

रूसी राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित उस लक्ष्य पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसके तहत घरेलू ईंधन की कीमतों को अनुमानों से ऊपर बढ़ने से रोकना है. 

ऊर्जा मंत्रालय ने रिपोर्ट में क्या बताया?

तेल शोधन दरें मार्च 2025 के स्तर पर बनी हुई हैं. जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है. बयान में कहा गया है, 'इंडस्ट्री की कंपनियों ने पुष्टि की है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उनके पास पेट्रोल और डीज़ल के पर्याप्त भंडार हैं, और रिफाइनरियों की क्षमता का भी पूरा इस्तेमाल किया जा रहा है.'

इन चर्चाओं के बाद नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को एक प्रस्ताव का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया. जिसमें 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर रोक लगाने की बात कही गई है. इसका मकसद घरेलू कीमतों को स्थिर रखना और स्थानीय बाजार में आपूर्ति को प्राथमिकता देना है.