मोहन भागवत के दौरे के बाद US में सियासी घमासान, RSS से जुड़े चंदे पर 90 नेताओं का बड़ा फैसला

अमेरिका में करीब 90 नेताओं ने RSS से जुड़े लोगों और संस्थाओं से राजनीतिक चंदा नहीं लेने का संकल्प लिया है. इस सूची में भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS को लेकर अमेरिका की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है. करीब 90 अमेरिकी नेताओं ने संघ से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों से मिलने वाले राजनीतिक चंदे को ठुकराने की प्रतिबद्धता जताई है. इनमें भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं. यह अभियान RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए कार्यक्रम के कुछ दिनों बाद सामने आया. हालांकि, इस पहल का कुछ हिंदू अमेरिकी संगठनों ने कड़ा विरोध किया है.

31 अगस्त को Hindus for Human Rights Action और SACRED Acts ने यह संकल्प सार्वजनिक किया. इसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों से जुड़े संघीय, राज्य और स्थानीय स्तर के नेता शामिल हैं. आठ राज्यों के नेताओं ने RSS से जुड़े लोगों या सहयोगी संस्थाओं से राजनीतिक योगदान नहीं लेने की बात कही है. संकल्प में पहले मिले ऐसे धन को लौटाने या लोकतंत्र समर्थक संगठनों को देने की भी बात कही गई है.

मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे के बाद अभियान

यह अभियान मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में आयोजित Universal Oneness Celebration में शामिल होने के बाद शुरू हुआ. कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue ने किया था. यह RSS के शताब्दी वर्ष के अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान का हिस्सा था. कार्यक्रम में भागवत ने अंतरधार्मिक समझ और सार्वभौमिक एकता की बात रखी थी.


रो खन्ना और प्रमिला जयपाल का रुख

संकल्प पर हस्ताक्षर करने वालों में मिशिगन से सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद, वाशिंगटन की सांसद प्रमिला जयपाल, कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना और इलिनॉय की सांसद रॉबिन केली प्रमुख नाम हैं. जयपाल ने RSS को दक्षिणपंथी संगठन बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों से दूरी जरूरी है. खन्ना ने RSS को अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं देने की बात कही और 6,600 डॉलर का एक योगदान दान करने की घोषणा की.

हिंदू अमेरिकी संगठनों ने उठाए सवाल

इस अभियान पर Hindu American Political Action Committee ने सवाल उठाया है. संगठन ने इसे भेदभावपूर्ण और हिंदू विरोधी बताया तथा आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को दबाव या गलत जानकारी के जरिए संकल्प पर हस्ताक्षर करवाए गए. Hindu American Foundation की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी अभियान को गैर-अमेरिकी बताया. उनका तर्क है कि केवल हिंदू अमेरिकी दानदाताओं के संबंधों की जांच करना उन्हें अनुचित तरीके से निशाना बनाने जैसा है.

अमेरिका में तेज हुई राजनीतिक बहस

RSS से जुड़े राजनीतिक चंदे को लेकर शुरू हुआ विवाद अब अमेरिकी राजनीति में धार्मिक पहचान, विदेशी संबंधों और राजनीतिक वित्तपोषण जैसे मुद्दों से जुड़ गया है. एक पक्ष इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि विरोध करने वाले संगठन इसे हिंदू अमेरिकियों के साथ भेदभाव बता रहे हैं. ऐसे में यह विवाद आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति और भारतीय मूल के मतदाताओं के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है.