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जितनी नौकर की सैलरी नहीं, उससे ज्यादा कुत्ते पर खर्च कर दिया? हिंदुजा परिवार पर लगे आरोप

ब्रिटेन के सबसे अमीर परिवार हिंदुजा परिवार पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने पालतू कुत्ते पर घर में काम कर रहे नौकरों से भी ज्यादा खर्च किए हैं. अदालत तक पहुंचे मामले में कहा गया कि इस रईस परिवार में नौकरी के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उनके साथ ज्यादती की जाती है. इसके अलावा, कम पैसे देने के बावजूद नौकरों से ज्यादा काम करवाने की भी चर्चाएं हैं.

India Daily Live

भारतीय मूल के अरबपति परिवार हिंदुजा पर आरोप लगे हैं कि उनके घर में पालतू कुत्तों पर ज्यादा खर्च किया जाता है जबकि नौकरों को कम पैसे दिए जाते हैं. यह मामला अब सिर्फ आरोपों तक नहीं है. हिंदुजा परिवार के खिलाफ स्विटजरलैंड में केस दर्ज किया गया है. हिंदुजा के लेक जिनेवा विला में काम कर चुके लोगों की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील ने मांग की है कि इन लोगों को भारतीय लोगों की तस्करी और उनके उत्पीड़न के आरोप में साढ़े पांच साल की सजा दी जाए.

कोर्ट में पेश हुए प्रोसेक्यूटर यवेस बर्टोसा ने आपराधिक अदालत में हिंदुजा परिवार पर तीखा हमला किया. उन्होंने कमर्चारियों और हिंदुजा परिवार के लोगों की गवाही के साथ-साथ अपनी जांच के दौरान अदालत को दिए गए साक्ष्य का हवाला दिया.

एक कुत्ते पर हुआ नौकर से ज्यादा खर्च!

यवेस बर्टोसा कहा, 'हिंदुजा परिवार ने अपने एक कुत्ते पर अपने एक नौकर से भी ज्यादा खर्च किया. उनके घर में काम कर रही महिला को एक बार सिर्फ 7 स्विस फ्रैंक यानी $7.84 का भुगतान किया है जबकि वह सप्ताह में सात दिन, 18 घंटे तक काम करती थी. वहीं, कुत्ते पर एक साल में 8,584 स्विस फ्रैंक खर्च किए गए.' 

बता दें कि स्विट्जरलैंड में अरबपति हिंदुजा परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ मानव तस्करी का मुकदमा चल रहा है. इन सभी सदस्यों पर लेक जिनेवा स्थित अपने विला में घरेलू कर्मचारियों का शोषण करने, 15 से 18  घंटे तक काम कराने के लिए मात्र 8 डॉलर का भुगतान करने और काम करने वाले लोगों का पासपोर्ट जब्त करने का आरोप लगा है. हालांकि, परिवार के वकीलों ने इन आरोपों से इनकार किया है.

जब्त कर लेते हैं कर्मचारियों के पासपोर्ट

बर्टोसा ने आगे कहा, 'यहां काम करने वाले लोगों को उनके मालिक के हिसाब से हर घंटे उपलब्ध रहना पड़ता है. उनके पासपोर्ट भी ले लिए जाते हैं. उनके पास खर्च करने के लिए स्विस फ्रैंक नहीं रहते क्योंकि उनका वेतन भारत में ऐसे लोगों के पास भेजा जाता है. जिन्होंने इन लोगों को काम करने के लिए स्विट्जरलैंड भेजा है. यहां काम करने वाले लोग मालिक के अनुमित के बिना घर से बाहर भी नहीं जा सकते'. 

हालांकि, परिवार के वकीलों ने बर्टोसा के इस बयान को एक सिरे से खारिज करते हुए उन नौकरों की गवाही का हवाला दिया जिन्होंने कहा कि उनके साथ अच्छा व्यवहार किया गया था.