क्या जंग में घायल हुए मोजतबा खामेनेई? युद्ध की खबरों के बीच ईरान के राष्ट्रपति के बेटे ने बताया पूरा सच
ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के घायल होने की खबरों को राष्ट्रपति के बेटे यूसुफ पेजेश्कियान ने खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं और उनके घायल होने की खबरें केवल अफवाह हैं.
नई दिल्ली: ईरान के नए नियुक्त सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई सुरक्षित हैं. ईरानी राष्ट्रपति के बेटे ने बुधवार को यह जानकारी दी. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मोजतबा इजराइल और अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान घायल हो गए थे. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बेटे और सरकारी सलाहकार यूसुफ पेजेश्कियान ने बुधवार को इन खबरों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मोजतबा खामेनेई के घायल होने की खबरें सही नहीं हैं और वह पूरी तरह सुरक्षित हैं.
उन्होंने अपने टेलीग्राम चैनल पर लिखा कि उन्होंने भी मोजतबा के घायल होने की खबरें सुनी हैं. फिर उन्होंने उन लोगों से बात की जिनका उनसे सीधा संपर्क था. उन्होंने कन्फर्म किया कि मोजतबा खामेनेई पूरी तरह से ठीक हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई है.
सरकारी टेलीविजन की ओर से क्या बताया गया?
उनके घायल होने की खबर पहले भी सामने आई थी. इससे पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने खामेनेई को रमजान युद्ध का एक घायल सैनिक बताया था. हालांकि, टीवी रिपोर्ट में उनकी चोटों की तरह या उनकी हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी.
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अपॉइंटमेंट की ऑफिशियल घोषणा में क्यों हुई देरी?
सूत्रों के मुताबिक ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाने में अहम भूमिका निभाई. गार्ड्स का मानना है कि मोजतबा उनकी कट्टर नीतियों का समर्थन करेंगे. खबर है कि कुछ सीनियर नेताओं और धार्मिक नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन IRGC ने उनके विरोध को नजरअंदाज कर दिया. इसी वजह से उनके अपॉइंटमेंट की ऑफिशियल घोषणा में कुछ घंटे की देरी हुई.
एक्सपर्ट्स ने क्या बताया?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मोजतबा खामेनेई के आने से ईरान में मिलिट्री असर और बढ़ सकता है. कुछ पुराने अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि IRGC का बढ़ता असर ईरान को एक मिलिट्री वाला देश बना सकता है. इससे सरकार की धार्मिक पहचान कमजोर हो सकती है और उसका पब्लिक सपोर्ट कम हो सकता है. भविष्य में ईरान की विदेश नीति और भी ज्यादा आक्रामक हो सकती है. इस बदलाव से सरकार की घरेलू और बाहरी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.