रूस में 6.4 तीव्रता के भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग, जानें कहां था केंद्र?
रूस के कामचटका क्षेत्र में सोमवार को 6.4 तीव्रता का भूकंप आया. भूकंप का केंद्र 24 किलोमीटर गहराई पर था. अब तक किसी तरह के नुकसान या हताहत की खबर नहीं है. यह क्षेत्र 'रिंग ऑफ फायर' का हिस्सा है जहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आम हैं.
नई दिल्ली: रूस के कामचटका क्षेत्र में सोमवार को 5.8 तीव्रता का भूकंप आया. यह झटका देश के पूर्वी तट पर दर्ज किया गया. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने जानकारी दी कि भूकंप की गहराई मात्र 24 किलोमीटर थी. इससे पहले जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) ने इसकी तीव्रता 6.4 बताई थी. हालांकि, अब तक किसी प्रकार के नुकसान या हताहत की खबर सामने नहीं आई है.
कामचटका क्षेत्र प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय इलाकों में गिना जाता है. यहां अक्सर तीव्र भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. जुलाई 2025 में इसी क्षेत्र में 8.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसके बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी. वह भूकंप 2011 के जापान के तोहोकू भूकंप के बाद दुनिया का सबसे शक्तिशाली झटका माना गया था.
इससे पहले कब आया था भूकंप?
सितंबर में भी राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) ने कामचटका के पूर्वी तट के पास दो बड़े झटके दर्ज किए थे. वहीं जुलाई में 7.8 तीव्रता का भूकंप इसी क्षेत्र में दर्ज किया गया था, जिसने रूस, जापान, गुआम, हवाई और अलास्का तक सुनामी अलर्ट जारी करवा दिए थे.
कामचटका में भूकंप आने की क्या है वजह?
NCS के अनुसार, यह भूकंप 52.56 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 160.10 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज हुआ था. इसकी गहराई 55 किलोमीटर थी. विशेषज्ञों का कहना है कि कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत और उत्तरी अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है. यही कारण है कि यह क्षेत्र हमेशा भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियों के प्रति संवेदनशील रहता है.
विश्व के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र कहां है?
अलास्का-अल्यूटियन सबडक्शन सिस्टम विश्व के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है. पिछले सौ वर्षों में इस क्षेत्र ने सबसे अधिक 8 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप दर्ज किए हैं. कई बार इन भूकंपों के साथ तटीय और समुद्री भूस्खलन भी हुआ, जिससे सुनामी उत्पन्न हुई. कामचटका क्षेत्र में 130 से अधिक ज्वालामुखी और ज्वालामुखीय क्षेत्र हैं, जिनमें से कई पिछले दो सौ वर्षों में सक्रिय रहे हैं. हाल के महीनों में यहां कई बड़े झटके दर्ज हुए हैं, हालांकि फिलहाल किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है.
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