PoK में बगावत की आग! सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, हिंसा में 11 की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में टैक्स और विधानसभा सीटों के विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं. इसमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है. मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की दमनकारी कार्रवाई पर चिंता जताई है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी की पीओके में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं. वहां चल रहे बड़े प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है जिसमें अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है और 70 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. इस पूरे बवाल की शुरुआत तब हुई जब वहां की सरकार ने 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' नाम के संगठन पर पाबंदी लगा दी. यह संगठन लंबे समय से इलाके की आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहा था.

हिंसा उस वक्त भड़की जब एक झड़प में मारे गए JAAC कार्यकर्ता के शव के पास भारी संख्या में समर्थक इकट्ठा हो गए. भीड़ को हटाने के लिए जब सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग किया तो दोनों तरफ से झड़प और गोलाबारी शुरू हो गई. इस हिंसक टकराव में कुछ पुलिसकर्मी और कई प्रदर्शनकारी मारे गए. हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है.

गुस्से की मुख्य वजहें क्या हैं?


JAAC संगठन पर बैन- क्षेत्रीय सरकार ने इस संगठन को आतंकवाद-विरोधी कानून के तहत गैरकानूनी घोषित कर दिया है. इससे स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं. समर्थकों का कहना है कि वे केवल आम जनता की जायज मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठा रहे थे इसलिए उन्हें सुरक्षा के लिए खतरा बताना गलत है.

विधानसभा सीटों का नया विवाद- दूसरा बड़ा कारण राजनीतिक है. सरकार ने 45 सदस्यों वाली विधानसभा में 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित कर दी हैं जो पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं. वहां के मूल निवासियों का मानना है कि इस फैसले से स्थानीय लोगों का राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा और उनकी आवाज दबा दी जाएगी.

कमरतोड़ महंगाई और बुनियादी समस्याएं- यह गुस्सा सिर्फ नया नहीं है. पिछले दो सालों से JAAC बढ़ती कीमतों, बेरोजगारी, बिजली की भारी किल्लत, महंगे बिलों और सरकार की अनदेखी के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहा है. लोग बदहाल जिंदगी और सरकार के ढुलमुल रवैये से तंग आ चुके हैं.

मानवाधिकार संगठनों की चिंता और विरोध

इस पूरे घटनाक्रम पर मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है. 'ह्यूमन राइट्स कमिशन ऑफ पाकिस्तान' ने प्रदर्शनकारियों पर आतंकवाद के कानून लगाने की आलोचना की है और सरकार से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने को कहा है. वहीं दूसरी तरफ पाबंदी के बावजूद JAAC के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे झुकेंगे नहीं और उनका आंदोलन जारी रहेगा. वे इंटरनेट बंदी और अपने नेता की मौत के खिलाफ लगातार विरोध जता रहे हैं.

चुनाव से पहले कड़े इंतजाम

आगामी 27 जुलाई को होने वाले क्षेत्रीय चुनावों को देखते हुए पूरे PoK में सुरक्षा बेहद सख्त कर दी गई है. कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बंद है भीड़ इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है और JAAC के मुख्य दफ्तर को भी सील कर दिया गया है. वहां बिगड़ते हालातों को देखते हुए दुनिया भर का ध्यान इस ओर गया है. ब्रिटेन ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर वहां न जाने की सलाह दी है. कुल मिलाकर PoK के लोगों का यह गुस्सा सालों की अनदेखी, महंगाई और अब राजनीतिक अधिकारों में कटौती किए जाने के कारण फूटा है जिसे बलपूर्वक दबाना सरकार के लिए मुश्किल साबित हो रहा है.