'हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं', POK में बगावत के सुर तेज, सड़कों पर उतरे हजारों लोग
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सरकार विरोधी आंदोलन तेज हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने खुले मंच से पाकिस्तान से असहमति जताई, खाद्य संकट और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई तथा अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकेत दिया.
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में चल रहा जनआंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है. रावलकोट में आयोजित एक बड़े प्रदर्शन में लोगों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाओं, सस्ते राशन, बिजली, पानी और रोजगार जैसी जरूरतों के लिए लंबे समय से संघर्ष करना पड़ रहा है. हाल के दिनों में बढ़ती पाबंदियों और आपूर्ति संबंधी समस्याओं ने स्थानीय लोगों के असंतोष को और अधिक बढ़ा दिया है.
रावलकोट में विरोध प्रदर्शन ने पकड़ी रफ्तार
रावलकोट के ईदगाह मैदान में जुटी बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जम्मू कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय जनता को आवश्यक सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्षेत्र में खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होने से आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मंच से दिए गए भाषणों में प्रशासन की नीतियों की आलोचना की गई और जनता की समस्याओं के समाधान की मांग दोहराई गई.
बुनियादी सुविधाओं को लेकर बढ़ा असंतोष
आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें नई नहीं हैं. वे लंबे समय से सस्ती बिजली, स्वच्छ पानी, बेहतर सड़कें, रोजगार के अवसर और पारदर्शी प्रशासन की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों के अनुसार इन मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई, जिससे जनता में नाराजगी बढ़ी है. स्थानीय संगठनों का दावा है कि आम नागरिकों की आवाज को अनदेखा किया जा रहा है और यही कारण है कि विरोध प्रदर्शन लगातार विस्तार ले रहा है.
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प्रतिबंधों और कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
आंदोलन से जुड़े नेताओं पर कानूनी कार्रवाई और विभिन्न प्रतिबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनके खिलाफ सख्त कदम उठाकर विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. दूसरी ओर प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मामला बता रहा है. हाल के दिनों में संचार सेवाओं पर लगी पाबंदियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा गया है.
खाद्य संकट और तनावपूर्ण हालात
स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की कमी की खबरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की बात सामने आई है. आंदोलन और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों के हताहत होने की भी खबरें हैं. लगातार बढ़ते तनाव के बीच स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है. फिलहाल प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं.