India US Relations: मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात के आने लगे रूझान, अमेरिकी दूतावास ने भारत के साथ संबंधों को लेकर लिया यूटर्न!
पीएम नरेंद्र मोदी ने SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात कर दोस्ताना रिश्तों का संदेश दिया. इसी बीच अमेरिकी दूतावास ने भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी का परिभाषित करने वाला रिश्ता बताया. अमेरिका ने इस साझेदारी को नवाचार, रक्षा और द्विपक्षीय सहयोग का प्रतीक माना. इससे यह दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर संतुलित कूटनीति अपना रहा है.
India US Relations: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गई है. चीन के तियानजिन में हो रहे इस सम्मेलन में तीनों नेताओं के बीच दोस्ताना माहौल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग को आपसी बातचीत करते, गले मिलते और हाथ मिलाते देखा गया, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा.
इसी बीच अमेरिका ने भारत के साथ अपने रिश्तों को एक बार फिर खास बताया है. सोमवार को अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी 21वीं सदी की परिभाषित करने वाली संबंध है. इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का हवाला देते हुए कहा गया कि भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं. दूतावास ने लिखा कि यह साझेदारी नवाचार, उद्यमिता, रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों तक फैली हुई है. यह हमारी दोनों जनता के बीच की स्थायी दोस्ती है जो इस यात्रा को आगे बढ़ा रही है.
सोशल मीडिया पर अभियान
अमेरिका ने अपने सोशल मीडिया अभियान के तहत #USIndiaFWDforOurPeople हैशटैग को भी बढ़ावा दिया और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की. अमेरिका की इस प्रतिक्रिया को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब मोदी चीन और रूस के नेताओं के साथ घनिष्ठता दिखा रहे हैं. इससे यह संदेश गया है कि भारत वैश्विक स्तर पर संतुलित कूटनीति की राह पर चल रहा है.
रूस और चीन के साथ भारत की तस्वीरें
अमेरिका और भारत के रिश्ते हाल के वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं. रक्षा सौदों, टेक्नोलॉजी सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी को लेकर दोनों देश पहले से कहीं अधिक नजदीक आए हैं. वहीं, SCO मंच पर रूस और चीन के साथ भारत की तस्वीरें यह संकेत देती हैं कि नई दिल्ली अपनी बहुपक्षीय कूटनीतिक रणनीति पर मजबूती से काम कर रही है.
दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति वैश्विक शक्ति संतुलन में उसकी भूमिका को और अधिक मजबूत कर रही है. अमेरिका जहां भारत को भविष्य का सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानता है, वहीं रूस और चीन के साथ भारत के संवाद यह बताते हैं कि नई दिल्ली किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं है. मोदी की SCO यात्रा और अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि भारत आज दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन साधते हुए अपने हितों को आगे बढ़ा रहा है.
और पढ़ें
- 2025 में कब-कब डोली धरती? जानें इस साल आए 5 सबसे बड़े भूकंप
- SCO Summit 2025: 'भारत-रूस कठिन परिस्थितियों में भी कंधे से कंधा मिलाकर चले', ट्रंप के 'टैरिफ अटैक' के बीच पुतिन से बोले PM मोदी
- Afghanistan Earthquake Update: अफगानिस्तान में हाहाकार, भूकंप से अब तक 800 से ज्यादा लोगों की मौत; 400 से ज्यादा घायल