हवा में अचानक लापता हुआ यात्री विमान, सर्च ऑपरेशन जारी; कहां और कब टूटा संपर्क? 

संपर्क टूटते ही कंट्रोल टावर ने इमरजेंसी डिस्टेस फेज घोषित कर दी और खोज अभियान शुरू किया गया. जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ है, वह पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा हुआ है. इस वजह से रेस्क्यू टीमों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

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Anuj

नई दिल्ली: इंडोनेशिया में शनिवार को एक यात्री विमान के लापता होने से हड़कंप मच गया. यह विमान जावा द्वीप से सुलावेसी द्वीप की ओर जा रहा था. उड़ान के दौरान जब विमान पहाड़ी इलाके में पहुंचा, तभी ग्राउंड कंट्रोल से उसका संपर्क टूट गया. विमान में कुल 11 लोग सवार थे, जिनमें 8 क्रू मेंबर और 3 यात्री शामिल थे.

घटना के बाद तुरंत सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी के सुरक्षित होने या हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.

कहां और कब टूटा विमान से संपर्क? 

लापता विमान इंडोनेशिया एयर ट्रांसपोर्ट कंपनी का टर्बोप्रॉप ATR 42-500 था. यह विमान योग्याकार्ता से दक्षिण सुलावेसी की राजधानी की ओर उड़ान भर रहा था. परिवहन मंत्रालय की प्रवक्ता एंडाह पुर्नामा सारी ने बताया कि दोपहर 1 बजकर 17 मिनट पर विमान को मारोस जिले के लेआंग-लेआंग इलाके में आखिरी बार रडार पर देखा गया. लैंडिंग से पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को अप्रोच एलाइनमेंट सही करने के निर्देश दिए थे. इसके कुछ ही पलों बाद रेडियो संपर्क पूरी तरह टूट गया.

रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

संपर्क टूटते ही कंट्रोल टावर ने इमरजेंसी डिस्टेस फेज घोषित कर दी और खोज अभियान शुरू किया गया. जिस क्षेत्र में विमान लापता हुआ है, वह पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा हुआ है. इस वजह से रेस्क्यू टीमों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. खोज अभियान में वायुसेना के हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी टीमें लगाई गई हैं. दक्षिण सुलावेसी के सैन्य कमांडर मेजर जनरल बांगुन नवोको ने इसकी पुष्टि की है.

मलबा दिखने की जानकारी मिली

इस बीच माउंट बुलुसराउंग क्षेत्र में ट्रैकिंग कर रहे कुछ लोगों ने पहाड़ पर विमान जैसा मलबा, लोगो और आग लगने के निशान देखने की बात कही है. हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है. रेस्क्यू टीमें इन सूचनाओं के आधार पर मौके तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.

दुर्गम इलाका बना चुनौती

लेआंग-लेआंग इलाका चूना-पत्थर की पहाड़ियों, गुफाओं और घने जंगलों के लिए जाना जाता है. यह क्षेत्र बंटिमुरुंग-बुलुसाराउंग नेशनल पार्क का हिस्सा है. संकरी घाटियां और ऊंची चट्टानें राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही हैं. मौसम में बादल होने के बावजूद दृश्यता ठीक बताई जा रही है, लेकिन भौगोलिक स्थिति के कारण खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.