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17 साल का नाबालिग PUBG में हारा तो गुस्से में परिवार के चार सदस्यों को गोली से उड़ाया, अब हुई 100 साल की सजा

लाहौर की अदालत ने 17 वर्षीय जैन अली को अपनी मां, भाई और दो बहनों की हत्या के आरोप में 100 साल की जेल की सजा सुनाई है. यह हत्या ऑनलाइन गेम PUBG में उसकी लत और परिवार द्वारा डांटने के कारण हुई थी.

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Kuldeep Sharma

पाकिस्तान में एक किशोर ने गेम PUBG में अपनी असफलताओं के चलते अपने परिवार के चार सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी. अदालत ने हाल ही में उसे चार अलग-अलग मामलों में उम्रकैद, कुल मिलाकर 100 साल की सजा सुनाई. इस घटना ने ऑनलाइन गेमिंग और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

PUBG एक मल्टीप्लेयर बैटल रॉयल गेम है, जिसमें 100 खिलाड़ी जीवित रहने के लिए संघर्ष करते हैं. पुलिस के अनुसार जैन अली अक्सर गुस्से में आ जाता था जब वह गेम में अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाता था. हत्या के दिन, वह कई घंटों तक गेम खेलते हुए लक्ष्य चूक गया और उसकी मां ने उसे डांटा, जिसके बाद उसने अपने आप पर नियंत्रण खो दिया.

हत्या का भयावह दृश्य

जांच के अनुसार, अली ने अपनी मां का लाइसेंसशुदा पिस्टल उठाया और उस कमरे में गया जहां उसकी मां और छोटी बहनें सो रही थीं. उसने सीधे फायरिंग की. उसकी मां नाहिद मुबारक (45), बड़े भाई तैमूर (20), बहन महनूर (15) और जन्नत (10) सभी मौके पर ही मर गए. यह घटना न केवल परिवार बल्कि पड़ोस में रहने वालों के लिए भी सदमे की वजह बनी.

मानसिक स्वास्थ्य और लत

इस मामले में मनोवैज्ञानिक मोहम्मद अली खान का कहना है कि किशोर संभावित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था. उन्होंने बताया कि गुस्से पर नियंत्रण की समस्या, डिप्रेशन, बायपोलर डिसऑर्डर, इम्पल्स कंट्रोल डिसऑर्डर या मानसिक टूट का असर इस हिंसा में हो सकता है. कोर्ट ने भी इस बात को ध्यान में रखते हुए मृत्युदंड की बजाय उम्रकैद सुनाई.

अदालत का निर्णय और संदेश

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रियाज अहमद ने कहा कि अली ने अपने परिवार को पूरी तरह से बेरहमी से मार डाला और उसकी कार्रवाई का मुख्य कारण ऑनलाइन गेमिंग की लत थी. अदालत ने चार मामलों में 25-25 साल की सजा सुनाकर कुल 100 साल की जेल सुनिश्चित की.

सामाजिक चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना हमें गेमिंग लत और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता का अहसास कराती है. परिवारों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए और समय रहते लक्षण पहचान कर मदद लेनी चाहिए.