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अपनी मौत को भी रोक देते हैं इंसान, कुत्तों को हो जाता है मालिक के मरने का एहसास, इस किताब ने खोल दिए सारे राज

Nurse  Julie McFadden Book Nothing to Fear: नर्स जूली की किताब नथिंग टू फीयर में ऐसी कहानियां हैं जो इस बात की ओर इशारा करती हैं कि इंसान अपनी इच्छा अनुसार मरता है. वो अपनी मौत का समय खुद तय करता है. 

Gyanendra Tiwari
अपनी मौत को भी रोक देते हैं इंसान, कुत्तों को हो जाता है मालिक के मरने का एहसास, इस किताब ने खोल दिए सारे राज
Courtesy: Getty Image

Nurse  Julie McFadden Book Nothing to Fear : जो इस पृथ्वी पर आया है उसका जाना निश्चित है. इसी लिए इस धरा को मृत्यु लोक कहा जाता है. हममे से बहुत से लोगों को अपनी मौत का पता नहीं होता है. किसी की मौत कभी भी हो सकती है. लेकिन नर्स जूली की किताब नथिंग टू फीयर किताब में ऐसे कई बातों का वर्ण दिया गया जो इस बात की ओर संकेत देते हैं कि बहुत से इंसान अपनी मौत को रोक देते हैं. वो अपनी इच्छा से मृत्यु लोग छोड़ते हैं. और कुत्तों को अपनी मालिक की मौत का आभास हो जाता है.

आज हम आपको नर्स जूली की पुस्तक नथिंग टू फीयर में छपी कुछ कहानियों को बताने जा रहे हैं. इन कहानियों को नर्स जूली ने वास्तविक रूप में अनुभव किया है. अनुभवों के आधार पर उन्होंने ये इस किताब को लिखा है. उनका मानना है कि कुछ लोग अपनी मौत को की तारीख समय खुद ही चुनते हैं.      

80 साल की बूढ़ी मां ने अपने बच्चों को किया किस और सो गईं मौत की नींद

इस किताब में एक अंश है, जिसमें 80 साल की जुआंटिया अपने 50 साल  के बेटे और उनकी केयर टेकर मारियाना के साथ रहती थी. मारियाना कई सालों से जुआंटिया की सेवा कर रही थी.

उनके यहां एक दिन नर्स जूली पहुंची. उन्होंने देखा कि तीनों के बीच कितना प्यार है. और उन्हें यह भी एहसास था की 80 साल कि जुआंटिया जल्द नहीं मरने वाली हैं. क्योंकि उनका स्वास्थ्य बहुत ही ठीक था. लेकिन कुछ हफ्तों बाद उन्हें पता चला कि उनकी मौत हो गई है. नर्स जूही के लिए यह बहुत ही आश्चर्य चकित कर देने वाला था. वो उनके घर गई. मारियाना ने उन्हें पूरी कहानी बताई.

मारियाना ने बताया कि  उसने और जुआंटिया ने साथ मिलकर हर संडे की तरह इस संडे भी साथ मिलकर ब्लूबेरी मफिन बनाए थे. मफिन बनाने के बाद जुआंटिया ने मारियाना को बुलाया और कहा कि वह उससे बहुत प्यार करती है.

जुआंटिया ने मारियाना का धन्यवाद जताया. और कहा कि वह अब घर जाना चाहती है. इस पर जब मारियाना ने कहा कि वह क्या बात कर रही हैं तो जुआंटिया ने उत्तर दिया कि वह अब बहुत ही थक चुकी हैं.

मारियाना ने कहा कि सब कुछ सही है. आप घर पर ही हैं. हम आपको सुबह देखती है. चलिए मैं आपका बिस्तर लगा दूं आप सो जाइए.

जुआंटिया बिस्तर पर गई. उसने मारियाना से अपने बेटे को रिकी को बुलाने को कहा. रिकी आया मां ने उसके माथे पर चुंबन किया और कहा आई लव व्यू स्वीट बॉय. जवाब में बेटे ने भी माता को यही कहा.

इसके बाद सुबह जब मारियाना ने जुआंटिया का दरवाजा खोला तो उसने देखा कि वह बिस्तर पर मरी पड़ी हुई हैं.

नर्स लूसी ने इस कहानी के जरिए बताया कि व्यक्ति तब तक मरने का इंतजार करता है जब तक कि परिवार का अंतिम सदस्य या मित्र कमरे या घर से नहीं चला जाता. या उसके कमरे से चला नहीं जाता.

100 साल की महिला ने अपने पोते के लिए मौत को भी टाल दिया 

इस पुस्तक की एक दूसरी कहानी में लूसी ने बताया कि 100 साल की एक बुजुर्ग महिला थी. जब वह उनसे मिलने गई तो उसे लगा कि वह अब बस 2 से 3 दिनों में ही मर जाएंगी. उनकी हालात बहुत ही खराब थी. घरवालों ने सभी को बुलाया लिया. लेकिन बुजुर्ग महिला का पोते को आने में एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग सकता है.

पोते को एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग गया. लेकिन तब तक रचेल जीती रहीं. नर्स लूसी को घरवालों ने बताया कि 17 दिनों तक रचेल ने बिना खाना-पीना खाए जीवित रही. जब उनका पोटा आ गया उन्होंने उससे मिल लिया तब जाकर उन्होंने अंतिम सांस ली.

इस कहानी के जरिए नर्स लूसी ने बताया कि बहुत से व्यक्ति ऐसे होते  हैं जब तक वो अपने परिवार वालों और प्यार करने वालों से नहीं मिल लेते वो नहीं मरते हैं. या यूं कह लें कि वो मौत को भी रोक देते हैं.

मालिक के दर्द को समझते हैं कुत्ते 

एक तीसरी कहानी में नर्स लूसी ने मालिक के प्रति कुत्ते के प्यार को दर्शाया है. नर्स को एक पेशेंट की बेटी ने बताया कि जब उसके पिता मर रहे थे तो उनका कुत्ता उनके साथ था. उनका कुत्ता उनके कमरे में उनके साथ एक हफ्ते एक कोने पर टिका रहा. ऐसा लग रहा था जैसे कुत्ता बिल्कुल वही देख सकता था जो उसका मालिक देख रहा था, चाहे वह कुछ भी रहा हो.

इस कहानी के जरिए नर्स लूसी ये बताना चाहतीं है कि कुत्ते भी अपने मालिक के दर्द को समझते हैं.   

इन तीनों कहानियों के जरिए नर्स जूली ने अपनी किताब नथिंग टू फियर में बहुत कुछ बताया है. उन्होंने इस पुस्तक के जरिए इस बात को बताने की कोशिश की है इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है. मुख्यतौर पर वह अपनी मौत की तारीख खुद ही चुनता है. वही निश्चित करता है कि उसे कब इस धरा को छोड़कर जाना है.