अमेरिका पर सीधे अटैक करने की तैयारी में किंग जोंग उन! 'मेगा-पावर' मिसाइल की टेस्ट, 2500 किलोटन वाले इंजन का किया सफल परीक्षण
उत्तर कोरिया ने नए सॉलिड-फ्यूल मिसाइल इंजन का सफल परीक्षण कर अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है. यह इंजन पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली है और भविष्य में लंबी दूरी की मिसाइलों को और खतरनाक बना सकता है.
नई दिल्ली: उत्तर कोरिया एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाकर वैश्विक तनाव को नया मोड़ दे रहा है. तानाशाह किम जोंग उन ने उस नए ठोस-ईंधन वाले इंजन के परीक्षण का निरीक्षण किया, जिसे देश की भविष्य की ICBM मिसाइलों का आधार माना जा रहा है. सरकारी मीडिया के अनुसार, यह टेस्ट पहले से ज्यादा शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत है. ऐसे समय में जब दुनिया कई संघर्षों से घिरी है, उत्तर कोरिया का यह कदम अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई चिंता पैदा करता है.
इंजन की बढ़ी क्षमता और तकनीकी बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए अपग्रेडेड इंजन में कंपोजिट कार्बन फाइबर का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी क्षमता 2,500 किलोटन तक पहुंच गई. यह पिछले वर्ष के परीक्षण से काफी अधिक है. रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सुधार इसलिए किया गया है ताकि मिसाइल पर कई वारहेड लगाए जा सकें, जिससे अमेरिकी रक्षा प्रणाली को भ्रमित किया जा सके. इस तकनीक का लक्ष्य मिसाइलों को ज्यादा घातक और अप्रत्याशित बनाना है.
ठोस-ईंधन मिसाइलों का बढ़ता खतरा
सॉलिड-फ्यूल मिसाइलें इसलिए खतरनाक मानी जाती हैं क्योंकि इन्हें लॉन्च से पहले पहचानना मुश्किल होता है. तरल ईंधन की तुलना में इन्हें तैयार करने में समय नहीं लगता, जिससे इंटरसेप्ट करने की संभावना बहुत कम हो जाती है. उत्तर कोरिया का यह प्रयास उसके पांच साल के सैन्य विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें ICBM तकनीक को आधुनिक और तेज बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
किम जोंग उन के बयानों से बढ़ी हलचल
यह परीक्षण उसी समय सामने आया जब किम जोंग उन ने अपने देश को 'अपरिवर्तनीय परमाणु शक्ति' बताया. उन्होंने अमेरिका पर वैश्विक अस्थिरता का आरोप लगाते हुए कहा कि यह परीक्षण उत्तर कोरिया की रणनीतिक ताकत को मजबूत करने के लिए जरूरी है. किम के भाषण से साफ है कि देश अपनी सैन्य नीति में किसी तरह का नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं है.
वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उत्तर कोरिया अपनी मिसाइल तकनीक को इसी गति से उन्नत करता रहा, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. खासकर मल्टीपल वारहेड क्षमता और सॉलिड-फ्यूल तकनीक, मिसाइल डिफेंस सिस्टम को बड़ी चुनौती देती है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ पहले से मौजूद तनाव इस परीक्षण के बाद और बढ़ सकता है.