मोजों में छिपाकर ले जाते थे नोट, राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा! पुलिस ने रिकवर किए डिलीट CCTV फुटेज
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है. पुलिस ने डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज रिकवर किए हैं, जिनमें कुछ लोग नोट छिपाकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं. जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ जारी है.
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. जांच एजेंसियों को ऐसे सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिन्हें पहले हटाया जा चुका था. इन वीडियो के आधार पर पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. वहीं मामले में गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है.
रिकवर हुए फुटेज में दिखे संदिग्ध गतिविधियों के संकेत
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विशेषज्ञों की मदद से डिलीट किए गए सीसीटीवी वीडियो दोबारा हासिल किए गए हैं. इन फुटेज में कुछ लोग अपने मोजों और कपड़ों की जेबों में नोट छिपाकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं. हालांकि वीडियो की गुणवत्ता अभी पर्याप्त स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण संबंधित व्यक्तियों की पहचान नहीं हो पाई है. पुलिस तकनीकी सहायता लेकर फुटेज को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि वीडियो की स्पष्टता बढ़ने के बाद मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं और जांच को नई दिशा मिल सकती है.
जेल में बंद आरोपियों से लगातार पूछताछ
मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी फिलहाल अयोध्या जेल में बंद हैं. इनमें से कुछ आरोपियों से पहले ही पूछताछ की जा चुकी है, जबकि शेष लोगों से भी पुलिस ने विस्तृत सवाल-जवाब शुरू कर दिए हैं. रविवार को जांच टीम जेल पहुंची और कई आरोपियों से अलग-अलग बातचीत की. सुरक्षा कारणों से सभी आरोपियों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है. पुलिस को आशंका थी कि यदि उन्हें एक साथ रखा गया तो वे आपस में किसी तरह की रणनीति बना सकते हैं या जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया.
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जांच पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगी कानूनी कार्रवाई
इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा जारी है. जांच एजेंसियां अब उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ से मिले तथ्यों को एकत्र कर रही हैं. सूत्रों का कहना है कि विशेष जांच दल अपनी रिपोर्ट पूरी करने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है. जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान साक्ष्यों को मजबूत करने और मामले की हर परत को सामने लाने पर केंद्रित है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई स्पष्ट हो सके.