नई दिल्लीः न्योयार्क से बड़ी खबर सामने आ रही है. सोमवार को दुनिया के राजनीतिक इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ रहा है जिसने पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है. निकोलस मादुरो को सोमवार को भारी सुरक्षा के बीच न्यूयॉर्क के मैनहट्टन फेडरल कोर्टहाउस में पेश किया गया. शनिवार को अमेरिकी सेना ने उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ किए गए नाटकीय स्नैच एंड ग्रैब ऑपरेशन के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति है.
मादुरो के भाग्य का फैसला अब 92 वर्षीय सीनियर फेडरल जज एल्विन के. हेलरस्टीन के हाथों में है. 1998 में बिल क्लिंटन द्वारा नियुक्त जज हेलरस्टीन ने 9/11 आतंकी हमलों जैसे जटिल और हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है. मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और अमेरिका में बड़े पैमाने पर कोकीन तस्करी की साजिश रचने के गंभीर आरोप हैं.
मदुरो और उनके पहचाने गए साथियों पर मुख्य आरोप नारको-टेररिज्म और कोकीन इम्पोर्ट करने की साज़िश से जुड़े हैं. अमेरिकी कानून के तहत इन अपराधों के लिए अधिकतम उम्रकैद की सज़ा हो सकती है.
नारको-टेररिज्म की साजिश, कोकीन इम्पोर्ट करने की साजिश, मशीन गन-खतरनाक डिवाइस रखना और मशीन गन और खतरनाक डिवाइस रखने की साजिश.
आरोप पत्र 25 दिसंबर, क्रिसमस के दिन से पहले न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले में सील करके दायर किया गया था. शनिवार को जारी किए गए दस्तावेज में अपदस्थ वेनेजुएला के राष्ट्रपति पर एक भ्रष्ट, अवैध सरकार चलाने का आरोप लगाया गया है. आरोप पत्र में मदुरो पर उनकी पत्नी, उनके बेटे और तीन अन्य लोगों के साथ आरोप लगाए गए हैं.
इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वेनेजुएला में जब तक सुरक्षित और समझदारी भरा सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका उस देश को चलाएगा. ट्रंप ने मार-ए-लागो से प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वेनेजुएला का तेल भंडार और उसका प्रशासन अब अस्थायी रूप से अमेरिकी नियंत्रण में रहेगा. उन्होंने इसे अमेरिकी सुरक्षा और न्याय के लिए उठाया गया कदम बताया है.
मादुरो की अनुपस्थिति में वेनेजुएला के सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है. दिलचस्प बात यह है कि रोड्रिग्ज ने तनाव कम करने के लिए अमेरिका के साथ सहयोग करने की इच्छा जताई है, हालांकि वेनेजुएला की संप्रभुता पर सवाल अब भी बरकरार हैं.
चीन और रूस दोनों देशों ने इसे सशस्त्र आक्रामकता बताते हुए कड़ी निंदा की है.भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया है. अब यह देखना भी दिलचस्प होगा कि क्या यह तीनों देश अमेरिका के खिलाफ कोई एक्शन लेंगे या नहीं. अब पूरे विश्व की लेंडस्केप बदलती दिख सकती है. साथ ही तीसरे विश्व युद्ध का आगाज हो सकता है.