नई दिल्ली: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक विरोध प्रदर्शन उस समय विवादों में घिर गया, जब प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर हमास के समर्थन में नारे लगाए. यह घटना क्वींस के एक यहूदी बहुल क्षेत्र में हुई, जिससे सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मेयर जोहरान ममदानी से लेकर राज्य की गवर्नर और कांग्रेस सदस्यों तक, सभी को प्रतिक्रिया देनी पड़ी.
क्वींस इलाके से सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी फिलिस्तीनी झंडे लहराते हुए 'हम हमास का समर्थन करते हैं' जैसे नारे लगाते दिखे. यह वही इलाका है, जहां बड़ी संख्या में यहूदी परिवार रहते हैं. वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी दोनों देखने को मिली. कई लोगों ने इसे उकसाने वाली और जानबूझकर तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई बताया, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए.
गौरतलब है कि हमास को अमेरिका पहले से ही एक आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. ऐसे संगठन के समर्थन में नारे लगना अमेरिकी कानून और सामाजिक मूल्यों दोनों के लिहाज से गंभीर मसला माना जाता है. यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब अमेरिका में यहूदी समुदाय की सुरक्षा को लेकर पहले ही चिंताएं बनी हुई हैं. इसी कारण इस प्रदर्शन को सामान्य विरोध नहीं, बल्कि संवेदनशील उकसावे के तौर पर देखा गया.
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने इस नारेबाजी की खुलकर निंदा की. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि आतंकवादी संगठनों के समर्थन के लिए शहर में कोई जगह नहीं है. मेयर ने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि लोग बिना डर के अपने धार्मिक स्थलों पर जा सकें, साथ ही शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा भी की जाएगी.
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने बयान जारी कर कहा कि हमास यहूदियों के नरसंहार का आह्वान करता है और ऐसी बयानबाजी घृणित व खतरनाक है. कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्य एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने भी इस घटना को यहूदी विरोधी करार दिया. उन्होंने कहा कि यहूदी बहुल इलाके में इस तरह के नारे लगाना जानबूझकर समुदाय को डराने जैसा है.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेयर ममदानी के पुराने बयान भी फिर चर्चा में आ गए हैं. पिछले साल अक्टूबर में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने हमास की सीधी निंदा से बचते हुए बातचीत को महंगाई और घरेलू मुद्दों की ओर मोड़ दिया था. अब ताजा घटना के बाद उनके बदले हुए रुख को कुछ लोग दबाव का नतीजा बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे स्पष्ट और जिम्मेदार नेतृत्व मान रहे हैं.