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India Daily

नेपाल में रसुवा की बाढ़ से 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित, 748 मेगावाट क्षमता पर असर

नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ ने 13 जलविद्युत परियोजनाओं को प्रभावित किया है. इनमें आठ चालू और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं. कुल 748 मेगावाट बिजली क्षमता पर असर पड़ा है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
नेपाल में रसुवा की बाढ़ से 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित, 748 मेगावाट क्षमता पर असर
Courtesy: ai generated

नई दिल्ली: नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने जलविद्युत क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. रसुवा और आसपास के इलाकों में नदियों के उफान से बिजली परियोजनाओं के साथ सड़क और प्रसारण ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है. शुरुआती आकलन में 748 मेगावाट क्षमता प्रभावित होने की बात सामने आई है.

रसुवा में आठ चालू परियोजनाएं प्रभावित

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के शुरुआती विवरण के मुताबिक, रसुवा जिले में बाढ़ से प्रभावित 13 परियोजनाओं में आठ ऐसी हैं, जिनसे पहले से बिजली उत्पादन हो रहा था. इनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट बताई गई है. प्रभावित परियोजनाओं में 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1, 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी, 120 मेगावाट की रसुवा-भोटेकोशी, 78 मेगावाट की सान्जेन खोला, 22 मेगावाट की चिलिमे, 20 मेगावाट की लांगटांग खोला और 6.42 मेगावाट की अपर मेलुंग-ए शामिल हैं. इन परियोजनाओं में से कई भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़ी हैं, जहां बाढ़ का प्रभाव बेहद गंभीर रहा. फिलहाल वास्तविक नुकसान का आकलन शुरुआती स्तर पर है और जमीनी जांच के बाद तस्वीर और साफ होगी.

नुवाकोट की परियोजनाओं पर भी पड़ा असर

बाढ़ का प्रभाव केवल रसुवा जिले तक सीमित नहीं रहा. पड़ोसी नुवाकोट में भी कई जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आई हैं. वहां चालू परियोजनाओं में 24 मेगावाट की त्रिशूली, 14.1 मेगावाट की देवीघाट, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए और 25 मेगावाट की सौर परियोजना शामिल हैं.

इन चार परियोजनाओं की कुल क्षमता 123 मेगावाट बताई गई है. इसके अलावा निर्माणाधीन परियोजनाओं में 37 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3बी और 15.6 मेगावाट की मिडिल त्रिशूली गंगा भी प्रभावित हुई हैं. इन दोनों की संयुक्त क्षमता 52.6 मेगावाट है. इससे साफ है कि बाढ़ ने बिजली उत्पादन के साथ उन परियोजनाओं के निर्माण कार्य को भी प्रभावित किया है, जो अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई थीं.

748 मेगावाट क्षमता प्रभावित होना बड़ी चिंता

नेपाल की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की अहम भूमिका है. ऐसे में कुल 748 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं का प्रभावित होना देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. बाढ़ से बांध, पावरहाउस, टरबाइन, जनरेटर, पहुंच मार्ग और बिजली प्रसारण से जुड़ी संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका है.

कई जगह रास्ते टूटने के कारण राहत और तकनीकी टीमों के लिए प्रभावित परियोजनाओं तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है. परियोजनाओं में मलबा भरने या उपकरणों को नुकसान पहुंचने की स्थिति में बिजली उत्पादन बहाल करने में समय लग सकता है. नेपाल विद्युत प्राधिकरण ने अभी अंतिम नुकसान का आंकड़ा जारी नहीं किया है. विस्तृत जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि कितनी परियोजनाओं में उत्पादन कब तक सामान्य हो पाएगा.

बाढ़ ने हिमालयी परियोजनाओं की चुनौती फिर दिखाई

बाढ़ के बाद राहत और बचाव के साथ बिजली परियोजनाओं की सुरक्षा और मरम्मत का काम भी महत्वपूर्ण हो गया है. सेना और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कई स्थानों पर काम में मुश्किलें आ रही हैं. यह घटना हिमालयी इलाकों में बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को फिर सामने लाती है.

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF जैसे खतरों को देखते हुए बेहतर चेतावनी प्रणाली, मजबूत ढांचे और समय पर सूचना साझा करने की जरूरत बढ़ गई है. नेपाल विद्युत प्राधिकरण की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद नुकसान और मरम्मत में लगने वाले समय की सही तस्वीर सामने आएगी. फिलहाल प्रभावित परियोजनाओं को जल्द बहाल करना बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है.