नई दिल्ली: नेपाल और चीन की सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने हिमालयी इलाके में भारी तबाही मचाई है. इस घटना के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर नेपाल में बहने वाली भोटेकोशी भारत पहुंचने पर किस नाम से जानी जाती है. दरअसल, इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है. भोटेकोशी सीधे भारत में प्रवेश करने वाली वही नदी नहीं है, बल्कि नेपाल में आगे चलकर सुनकोशी नदी में मिलती है और फिर कोसी नदी की विशाल जल प्रणाली का हिस्सा बन जाती है.
भोटेकोशी का ऊपरी हिस्सा तिब्बत में बहता है, जहां इसे पोइकू के नाम से भी जाना जाता है. नेपाल में प्रवेश करने के बाद इसे भोटेकोशी कहा जाता है. नेपाली शब्द 'भोटे' का संबंध तिब्बत से है. यह नदी नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में बहते हुए रसुवा और सिंधुपालचौक इलाके से गुजरती है. नेपाल सरकार के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग की निगरानी व्यवस्था में रसुवागढ़ी के पास भोटेकोशी का जलमापी केंद्र भी मौजूद है.
भोटेकोशी को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि भारत में प्रवेश करते समय इसका नाम सीधे कोसी नहीं हो जाता. भोटेकोशी नेपाल में आगे जाकर सुनकोशी नदी में मिलती है. इसके बाद सुनकोशी समेत अरुण और तमोर जैसी प्रमुख नदियां मिलकर कोसी की मुख्य धारा बनाती हैं. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार भोटेकोशी को कोसी नदी की प्रमुख सहायक नदियों में गिना जाता है. इसलिए इसे कोसी नदी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी कहना ज्यादा सही है.
नेपाल में कोसी नदी को सप्तकोशी भी कहा जाता है. इसका कारण इसकी ऊपरी जल प्रणाली में शामिल प्रमुख नदियां हैं. सुनकोशी, अरुण और तमोर के साथ अन्य सहायक नदियां मिलकर चतरा के आसपास सप्तकोशी का रूप लेती हैं. इसके बाद यह नदी दक्षिण की ओर बढ़ती है. बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के अनुसार कोसी नदी का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल और तिब्बत में फैला है और नदी भारत में हनुमाननगर के पास प्रवेश करती है.
जब यह विशाल नदी तंत्र नेपाल से निकलकर बिहार में पहुंचता है, तब इसे कोसी के नाम से जाना जाता है. बिहार में इसका प्रवेश हनुमाननगर क्षेत्र के पास माना जाता है. इसके बाद नदी बिहार के मैदानी इलाकों से गुजरते हुए कटिहार जिले के कुरसेला के पास गंगा में मिल जाती है. इस पूरे नदी तंत्र का बड़ा हिस्सा भारत के बाहर नेपाल और तिब्बत में है. बिहार सरकार के आंकड़ों के मुताबिक कोसी का कुल जलग्रहण क्षेत्र करीब 74,030 वर्ग किलोमीटर है.
कोसी का नाम बिहार में अक्सर 'बिहार का शोक' कहकर लिया जाता है. इसका कारण नदी का बार-बार बाढ़ और धारा बदलने का इतिहास है. हिमालय से भारी मात्रा में गाद आने और मैदानी क्षेत्र में ढाल कम होने के कारण नदी का प्रवाह प्रभावित होता है. बिहार के सुपौल, सहरसा, मधेपुरा समेत कई जिलों में कोसी की बाढ़ का असर देखा जाता है. इसी वजह से भोटेकोशी में आई बाढ़ को केवल नेपाल की घटना मानना सही नहीं होगा, क्योंकि यह उसी बड़े कोसी नदी तंत्र का हिस्सा है.