नई दिल्ली: 26 अगस्त 2026… यह दिन नेपाल के लिए एक काला पन्ना बनकर रह गया है. इस दिन नेपाल में भयानक बाढ़ आई, जिसमें 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. वहीं, करीब 5000 लोग अब भी लापता है. इस त्रासदी को 13 दिन बीत चुके हैं. लोगों के दिलों में इस त्रासदी का दर्द लगातार बना हुआ है. हर किसी ने कुछ न कुछ खोया ही है. इस बीच सोमवार को पूरे नेपाल में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है. देशभर में बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है.
नेपाल सरकार ने 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है. आज के दिन नेपाल में सरकारी कार्यालयों के साथ विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों में भी राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. यह शोक इस त्रासदी के 13वें दिन रखा गया है. बता दें कि हिंदू परंपरा के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 13वां दिन शोक और श्रद्धांजलि के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी वजह से नेपाल सरकार ने इस दिन आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को याद करने का फैसला किया है.
नेपाल फ्लैश फ्लड को लेकर राहत बचाव कार्य अब भी जारी है. इस बीच सबसे बड़ी चिंता यह बनकर उभर रही है कि अभी भी करीब 5,000 लोग लापता है. इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. सुरक्षा बल और राहत टीमें कई इलाकों में मलबे के बीच लगातार तलाश कर रही हैं. हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ दूसरे देशों की विशेषज्ञ टीमें भी बचाव अभियान में मदद कर रही हैं. भारत की विशेषज्ञ टीम भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के प्रयासों में जुटी है.
उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने वाले प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने भी नेपाल के बचाव अभियान पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि नेपाल में एक जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग इलाकों में कई रेस्क्यू ऑपरेशन्स चल रहे हैं. हर जगह खतरे और परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए हर अभियान अपने आप में बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि मुश्किल हालात में भी किसी काम को नामुमकिन नहीं मानना चाहिए और लोगों को बचाने की कोशिश लगातार जारी रखनी चाहिए.
इसके साथ ही यह भी कहा कि बाढ़ में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने के अगले दिन यानी 8 सितंबर को नेपाल में सार्वजनिक अवकाश रहेगा. यह छुट्टी Gen Z शहीद दिवस के मौके पर रखी गई है. बता दें कि पिछले साल 8 सितंबर को काठमांडू में Gen Z के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू हुए थे. आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 72 लोगों की मौत हुई थी.