प्रकृति जब अपना रौद्र रूप दिखाती है तो फिर संभलने का भी मौका नहीं देती. इसका सबसे ताजा उदाहरण अभी के लिए नेपाल में अचानक आई बाढ़ है. हर दिन की तरह बुधवार को भी सभी लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में लगे थे, लेकिन शायद ही किसी को पता हो कि कुछ ही पल में ऐसा कुछ हो जाएगा, जिससे उनकी दुनिया ही पलट जाएगी.
नेपाल में आई बाढ़ में अबतक 160 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. वहीं 700 से भी ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है. जिसमें 133 भारतीय भी शामिल हैं.
मौसम विशेषज्ञों और जलविज्ञान का कहना है कि यह बाढ़ तब आई जब भूस्खलन की वजह से भोटे कोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे का रास्ता बंद हो गया और फिर नदी ने अचानक रास्ता बदल लिया. सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक रास्ता बंद होने के बाद नदी अपने तेज बहाव के साथ चीन की सीमा के पास ससुवागढ़ी के तिमुर इलाके में पहुंच गया. जिसमें स्याफ्रुबेसी और आसपास की दूसरी बस्तियां बह गई. जिसके बाद से पूरे इलाके में केवल दर्द का आलम है.
जब कोई घटना घटती है तो शायद उस वक्त उतना दर्द महसूस नहीं होता है, क्योंकि वे उसे उतना समझ और महसूस नहीं कर पाते हैं. लेकिन उस घटना के बाद का पल काफी कठिन हो जाता है. क्योंकि लोगों को यह समझा आ जाता है कि उस घटना ने उनका न भर पाने वाला नुकसान पहुंचाया है. ऐसे ही नेपाल के लोगों के लिए बुधवार की रात रही.
इस घटना के बाद जिन लोगों का परिवार गुम था या जो बेघर हो गए, वे अपने परिवार को रात भर ढूंढने की कोशिश करते हैं. वहीं जो लोग उस घटना से बच कर निकल आए उनके लिए उस दृश्य को भूल पाना मुश्किल हो रहा है कि उनकी आंखों के सामने उनका सबकुछ चला गया.
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया कि अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें लगभग 400 विदेशी नागरिक और 40 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लोगों तक मदद पहुंचाई जा रही है. नेपाल के लोगों का कहना है कि उन्हें इस घटना की थोड़ी भी सूझ नहीं थी. क्योंकि वहां न मौसम खराब था और न ही कोई बारिश हो रही थी. जिसकी वजह से उन्हें यह बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लग पाया कि अगले पल में कुछ ऐसा भी हो सकता है. हालांकि जब घटना घट गई तो लोगों के पास केवल मलबा बचा,जिसमें वे अपनों को तलाशते रह गए.
इस बाढ़ में 9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और 9 बैंकों की ब्रांच भी पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं. इसके अलावा कई पुल, गाड़ियां और सड़क पानी में सूखे पत्तों की तरह बह गए. नेपाल में आए इस संकट में भारत सरकार द्वारा लगातार मानवीय मदद की जा रही है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि उनकी आपदा राहत और मेडिकल मदद काठमांडू पहुंच चुकी है और पीड़ितों तक राहत भेजी जा रही है. हालांकि इस घटना में जितने लोग लापता हैं उनके परिवार वालों को अभी भी उम्मीद है कि शायद उनके लोग उन्हें वापस मिल जाए. पूरे नेपाल में एक दुख भरा सन्नाटा महसूस किया जा सकता है.