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अब नहीं सताएगा अस्तित्व का डर, NASA के वैज्ञानिकों ने खोज डाली दूसरी दुनिया! 

Science News: नासा के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष दूरबीन की मदद से एक एक्सोप्लैनेट की खोज कर ली है. इस ग्रह पर मानव जीवन संभव हो सकता है क्योंकि इसकी सतह का तापमान मात्र 24 डिग्री सेल्सियस है.

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अब नहीं सताएगा अस्तित्व का डर, NASA के वैज्ञानिकों ने खोज डाली दूसरी दुनिया! 
Courtesy: Social Media

Science News: नासा के वैज्ञानिकों ने एक दूसरी दुनिया की खोज कर ली है. यह पृथ्वी के आकार के बराबर ही है. सबसे खास बात यह है कि यह हमारे सौर मंडल के बेहद करीब भी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस ग्रह पर जीवन होने की संभावना हो सकती है. इस ग्रह का नाम ग्लिसे 12 बी है. यह एक एक्सोप्लैनेट है. यह एक छोटे और ठंडे तारे की परिक्रमा करता है जो धरती से लगभग 40 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. नासा ने इसकी खोज अंतरिक्ष दूरबीन का प्रयोग करके की है.

इस एक्सोप्लैनेट की खोज नासा के ट्रांजिटिंग एक्सोप्लेनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) के जरिए हुई है. कहा जा रहा है इस ग्रह की चौड़ाई पृथ्वी से लगभग 1.1 गुना ज्यादा हो सकती है. यह चौड़ाई इस ग्रह की शुक्र ग्रह के साथ समानता रखती है जिसे पृथ्वी की जुड़वा बहन भी कहा जाता है. इस ग्रह का आकार सूर्य से बहुत छोटा है इस कारण यह रहने योग्य क्षेत्र में आता है. यह ग्रह हर 12.8 दिन में अपनी कक्षा का एक पूरा चक्कर पूरा करता है. इस ग्रह की सतह का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस है.

पृथ्वी के जैसा आकार 

वैज्ञानिकों ने ग्लिसे 12 बी को अपने मूल रेड ड्वार्फ स्टार को पार करते हुए देखा. इस दौरान होने वाले पारगमन में प्रकाश में गिरावट आती है. इस गिरावट को पहचानने में TESS काफी माहिर है. इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें पहले नहीं पता था कि इसका आकार पृथ्वी के समान होगा या नहीं? हालांकि इसे देखने के बाद हमें सहूलियत हो गई. टोक्यो की एस्ट्रोबॉयोलॉजी सेंटर की प्रोफेसर मासायुकी कुजुहारा ने कहा कि इसकी खोज के बाद वैज्ञानिक इसके टेंपरेचर और साइज की पहचान करेंगे. वे खोजेंगे कि इस ग्रह पर जीवन जीने के लिए पानी मौजूद है या नहीं. 

पहुंचने में लगेंगे 2.25 लाख साल 

रिपोर्ट के अनुसार, इस ग्रह पर पहुंचा नहीं जा सकता है. यह ग्रह 40 प्रकाश वर्ष दूर है. दुनिया के सबसे तेज एयरक्राफ्ट से यहां जाने पर भी लगभग 2.25 लाख साल का समय लग जाएगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक बड़ी खोज है. यह हमारे सौरमंडल के खासा नजदीक है और  जिस पर जीवन जीने की संभावनाएं हो सकती हैं.